जहां एक ओर ग्लोबल टेंशन के चलते पूरी दुनिया पर महंगाई का साया मंडरा रहा है. भारत में भी थोक महंगाई जून जून में बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई है इसमें लगातार 8वें महीने तेजी है. मगर इन सभी के बीच बिहार में लोग धड़ल्ले से जमीन खरीद रहे हैं. डेटा बता रहे हैं कि बीते 3 सालों में प्रदेश में स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन से मिलने वाले रेवेन्यू में तेजी दर्ज की गई है. सरकार को भी उम्मीद है इस बार स्टांप शुल्क के जरिए उसकी कमाई बढ़ कर 10 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी. बिहार में जमीन और मकान की खरीदबिक्री का बाजार तेजी पकड़ता दिख रहा है. सरकार ने वित्त वर्ष 202627 में सिर्फ स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से 10,000 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा है. यह न सिर्फ पिछले साल के वास्तविक संग्रह से काफी अधिक है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकार को आने वाले समय में संपत्तियों की खरीदबिक्री और रजिस्ट्री में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद है. इसी भरोसे के साथ सरकार एक तरफ रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना रही है तो दूसरी तरफ सर्किल रेट और स्टांप शुल्क बढ़ाकर अपने राजस्व को भी मजबूत करने की तैयारी कर चुकी है. आइए आकड़ों के जरिए हकीकत को समझते हैं.

बिहार सरकार को जमीन और संपत्ति से होने वाली कमाई में अगले वित्त वर्ष में बड़ी छलांग की उम्मीद है. बजट 202627 में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. यह 202526 के संशोधित अनुमान 8,250 करोड़ रुपये से करीब 21 फीसदी ज्यादा है. वहीं 202425 में इस मद से 7,976 करोड़ रुपये की वास्तविक कमाई हुई थी. यानी दो साल के भीतर इस आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है. यह लक्ष्य तभी संभव है जब जमीन और संपत्ति की खरीदबिक्री का सिलसिला मजबूत बना रहे.
1. अनुमान से ज्यादा हुई थी कमाई
सरकार का भरोसा केवल भविष्य की उम्मीदों पर नहीं टिका है. पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं. वित्त वर्ष 202425 के बजट में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से 7,500 करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान था, लेकिन वास्तविक संग्रह 7,976 करोड़ रुपये रहा. यानी सरकार को अनुमान से 476 करोड़ रुपये ज्यादा और करीब 6 फीसदी अधिक राजस्व मिला. इससे साफ है कि राज्य में संपत्तियों की रजिस्ट्री अपेक्षा से अधिक हुई और सरकार को इसका सीधा फायदा मिला.
2. जमीन से भी बढ़ेगी सरकारी आय
सिर्फ स्टांप ड्यूटी ही नहीं, भूमि राजस्व से भी सरकार की कमाई बढ़ने की उम्मीद है. 202627 के बजट में 800 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 202526 के संशोधित अनुमान में यह 700 करोड़ रुपये है. यानी करीब 14 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है. 202425 में भूमि राजस्व से सरकार को 571 करोड़ रुपये मिले थे. लगातार बढ़ते लक्ष्य बताते हैं कि सरकार जमीन से जुड़े राजस्व स्रोतों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.
3. अगस्त से पूरी तरह डिजिटल होगी रजिस्ट्री
राज्य सरकार जमीन की खरीदबिक्री को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़े बदलाव कर रही है. अगस्त से बिहार में जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल हो जाएगी. इसके बाद लोगों को मोटी फाइलें लेकर रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. इस व्यवस्था की शुरुआत 11 जुलाई को हाजीपुर जिला निबंधन कार्यालय से की जा चुकी है. बिहार निबंधन नियमावली 2026 के तहत पहले चरण में 10 रजिस्ट्री कार्यालयों को पूरी तरह पेपरलेस बनाया जा रहा है. हाजीपुर के बाद 18 जुलाई से नौ और कार्यालय इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ जाएंगे. सरकार का दावा है कि इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और दस्तावेजों से जुड़ी गड़बड़ियों पर भी रोक लगेगी.
सर्किल रेट और स्टांप शुल्क दोनों बढ़ाए
राजस्व बढ़ाने की दिशा में सरकार ने संपत्तियों के मूल्यांकन और शुल्क में भी बदलाव किया है. नई व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन की न्यूनतम कीमत यानी सर्किल रेट में 100 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है. वहीं ग्रामीण और पेरिफेरल इलाकों में सर्किल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है. इसके साथ ही स्टांप शुल्क 7 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी कर दिया गया है. खरीदारों को पहले की तरह 2 फीसदी रजिस्ट्रेशन शुल्क भी देना होगा. इसका सीधा असर जमीन खरीदने वालों की जेब पर पड़ेगा. उदाहरण के तौर पर रक्सौल जैसे इलाकों में जमीन की सरकारी दरों में भारी बढ़ोतरी हुई है. यानी अब रजिस्ट्री अधिक मूल्य पर होगी और उसी अनुपात में सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से ज्यादा राजस्व मिलेगा.
सरकार की रणनीति क्या है?
पिछले कुछ समय से बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज रही है. विपक्ष लगातार सरकार पर राजकोषीय दबाव और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाता रहा है. ऐसे में सरकार अपने राजस्व के नए स्रोत मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसी रणनीति के तहत राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. कई संस्थाओं और कंपनियों को लीज पर जमीन उपलब्ध कराई गई है ताकि निवेश आए और आर्थिक गतिविधियां बढ़ें. इसके साथ ही पंचायत स्तर पर कर संग्रह, राज्य राजमार्गों पर टोल व्यवस्था और जमीन से जुड़े राजस्व में बढ़ोतरी जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं. सरकार के हालिया फैसलों को देखें तो साफ है कि उसकी रणनीति दोहरी है. एक तरफ रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर लोगों को सुविधा देना, फर्जीवाड़े को कम करना और समय बचाना है. दूसरी तरफ बढ़े हुए सर्किल रेट, अधिक स्टांप शुल्क और संपत्ति बाजार में तेजी का फायदा उठाकर सरकारी खजाने को मजबूत करना भी लक्ष्य है.



