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बदायूं में BJP नेता दुर्विजय सिंह शाक्य का रोड शो छात्रों के लिए बना मुसीबत! जाम में फंसे TET अभ्यर्थी, छूट गई परीक्षा

Badaun News: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के रोड शो के दौरान हाईवे पर लगे भीषण जाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि इस जाम की वजह से उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा देने जा रहे कई अभ्यर्थी समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पर्याप्त समय पहले घर से निकले थे, लेकिन कई किलोमीटर लंबे जाम में फंसने के कारण उनकी परीक्षा छूट गई.

बदायूं में BJP नेता दुर्विजय सिंह शाक्य का रोड शो छात्रों के लिए बना मुसीबत! जाम में फंसे TET अभ्यर्थी, छूट गई परीक्षा

रोड शो के दौरान चरमराई यातायात व्यवस्था

जानकारी के अनुसार, बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के आगमन पर बरेली से बदायूं तक भव्य रोड शो निकाला गया. रोड शो में बड़ी संख्या में समर्थक और वाहन शामिल हुए, जिससे हाईवे के कई हिस्सों में लंबा जाम लग गया. सड़क पर वाहनों की कतारें दूरदूर तक दिखाई दीं और आम लोगों के साथसाथ परीक्षा देने जा रहे छात्रछात्राओं को भी घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा. इस दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित नजर आई.

‘एक साल की मेहनत पर फिर गया पानी’

जाम में फंसे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी और समय से पहले घर से भी निकले थे. इसके बावजूद ट्रैफिक जाम के कारण वे निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके. छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने रोड शो के दौरान यातायात प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. उनका कहना है कि उनकी एक साल की मेहनत पर पानी फिर गया.

जांच और उचित कार्रवाई की मांग

परीक्षार्थियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि प्रशासन की लापरवाही के कारण उनकी परीक्षा छूटी है तो प्रभावित अभ्यर्थियों के हित में उचित निर्णय लिया जाना चाहिए. छात्रों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान परीक्षा और आम लोगों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित करने की भी मांग की है.

मामले को लेकर बढ़ी चर्चा

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. वहीं, अभ्यर्थियों की मांग है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य यातायात अव्यवस्था की भेंट न चढ़े.

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