बहुजन समाज पार्टी के भीतर पारिवारिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. पिछले 10 दिनों में मायावती अपने परिवार को लेकर 4 अलगअलग फैसले ले चुकी हैं. मायावती ने पहला फैसला आकाश आनंद को पद से हटाने को लेकर लिया. 3 सितंबर को उन्होंने एक बयान में कहा कि आकाश मैच्योर नहीं हैं. इसलिए उन्हें पद से हटाया जाता है. इसके 7 दिन बाद उन्होंने आकाश को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसी दिन मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान को उत्तराधिकारी घोषित किया, लेकिन 2 दिन बाद मायावती ने फिर अपना रुख बदल लिया.

मायावती ने शनिवार को अपने छोटे भतीजे ईशान को भी पार्टी से बाहर कर दिया. उनकी जगह भतीजी दीपिका को आगे लाने की बात कही. परिवार में मचे सियासी घमासान के बीच एक शख्स चर्चा के केंद्र में हैं. उनका नाम आनंद कुमार है. मायावती ने सारे फैसले आनंद के बच्चों को लेकर ही लिए हैं. हालांकि, पूरे विवाद में आनंद को लेकर मायावती ने कोई टिप्पणी नहीं की है. न ही इस पूरे एपिसोड में आनंद कुमार का कोई बयान सामने आया है.
बीएसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं आनंद कुमार
आनंद कुमार बीएसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. पार्टी के सभी पदाधिकारियों की सीधी रिपोर्ट आनंद कुमार को ही होती है. आनंद मायावती के छोटे भाई हैं और बीएसपी का सारा कामकाज वही देखते हैं. आनंद कुमार राजनीति में आने से पहले नोएडा में सरकारी क्लर्क थे. 2007 में पहली बार उनका नाम सुर्खियों में आया. उसके बाद आनंद मायावती के साथ साए की तरह रहते हैं.
आनंद कुमार की पहल पर ही मायावती ने आकाश आनंद को साल 2019 से पहले राजनीति में एंट्री दी थी. आकाश आनंद के सबसे बड़े बेटे हैं. आकाश को मायावती ने उत्तराधिकारी घोषित किया था. हालांकि, अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं.
मायावती भाई आनंद पर कुछ क्यों नहीं बोलती?
परिवार के पूरे बवाल में मायावती ने आकाश, ईशान और दीपिका पर फैसला लिया, लेकिन आनंद के पद को जस का तस रखा गया. आनंद को लेकर मायावती ने कोई फैसला नहीं लिया. हालांकि, पहले ऐसा नहीं था. पारिवारिक बवाल में मायावती ने साल 2018 में आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया था.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मायावती इस बार आनंद कुमार के खिलाफ कुछ क्यों नहीं बोल रही हैं?
1. आनंद इस वक्त पार्टी में उपाध्यक्ष हैं. बीएसपी संविधान के मुताबिक मायावती के बाद आनंद सबसे पावरफुल हैं. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक बुला सकते हैं. फैसला ले सकते हैं. इतना ही नहीं, आनंद को सभी पदाधिकारी सीधे रिपोर्ट करते हैं. इस रिपोर्ट को मायावती के सामने आनंद ही पेश करते हैं. ऐसे में आनंद के खिलाफ सख्त फैसला लेना मायावती के लिए इस वक्त मुफीद नहीं है.
2. साल 2019 में इनकम टैक्स का रेड आनंद कुमार के ठिकानों पर पड़ा था. उस वक्त इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का आकलन था कि आनंद की कुल संपत्ति 1300 करोड़ रुपए हो सकती है. 400 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति को आईटी डिपार्टमेंट ने जब्त किया था. दूसरी तरफ बीएसपी के पास इस वक्त 600 करोड़ रुपए की संपत्ति है. यानी बीएसपी के पास जितनी संपत्ति इस वक्त है, उससे ज्यादा आनंद कुमार के पास है.
3. शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा महिला होने के कारण उन्हें एक भरोसेमंद सहयोगी की जरूरत है. इसलिए आनंद को उन्होंने रख रखा है. मायावती ने कहा कि अगर मैं कांशीराम की तरह पुरुष होती तो मैं भी अपने भाई को राजनीति में नहीं लाती. उन्होंने कहा कि मैंने आनंद के दोनों बेटे को बीएसपी से दूर रखने का फैसला किया है.



