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Brain stroke recovery : ब्रेन स्ट्रोक के बाद रिकवरी भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें टिप्स

Satya Report: बीते कुछ सालों से भारत में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं. ब्रेन स्ट्रोक के बाद भी कई महीनों तक मरीज की सेहत का ध्यान रखने की जरूरत होती है. खासतौर पर रिहैबिलिटेशन भी उतना ही जरूरी होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले में सही रिकवरी प्लान जरूरी है. दवाएं, फिजियोथेरेपी और लगातार फॉलोअप जरूरी है.

Brain stroke recovery : ब्रेन स्ट्रोक के बाद रिकवरी भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें टिप्स
Brain stroke recovery : ब्रेन स्ट्रोक के बाद रिकवरी भी है जरूरी, डॉक्टर से जानें टिप्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि के दौरान सही इलाज मिलने के बाद जब मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होता है उसके बाद भी किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी होती है. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद एक सही रिकवरी प्लान का होना जरूरी है. अगर ये नहीं है तो फिर से किसी स्वास्थ्य समस्या के होने की आशंका रहती है. मरीजों को यह पता होना चाहिए कि किस समय कौन सी थेरेपी लेनी हैं. क्या दवाएं खानी है और कब तक रिहैबिलिटेशन चलना जरूरी है.

रिकवरी का भी होता है गोल्डन पीरियड

HCAH के प्रेसिंडेंट डॉ. गौरव ठुकराल बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद शुरुआती कुछ हफ्ते बेहद अहम होते हैं. इस दौरान दिमाग न्यूरोप्लास्टी की अवस्था में होता है, जब वह खुद को दोबारा व्यवस्थित कर सकता है. ब्रेन स्ट्रोक ठीक होने के बाद उसकी रिकवरी का भी एक गोल्डन पीरियड होता है.स्ट्रोक के बाद 6 से 12 हफ्तों का समय रिकवरी के लिए गोल्डन पीरियड माना जाता है.

अगर इस दौरान सही केयर, एक्सरसाइज और रिहैब मिले तो मरीज की रिकवरी अच्छी होती है. इससे मरीज की सेहत में काफी सुधार हो सकता है, लेकिन कई मामलों में देखा जाता है कि लोग स्ट्रोक के बाद होने वाले रिहैबिलिटेशन पर कम ध्यान देते हैं.

देश में रिहैबिलिटेशन सेवाओं को बढ़ाने की जरूरत

डॉ गौरव के मुताबिक, देश में रिहैबिलिटेशन सेवाओं को बढ़ाने की जरूरत है. देश में करीब 1,200 से कुछ अधिक स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन सेंटर मौजूद हैं, जो आबादी के अनुपात में बेहद कम हैं. इनकी संख्या बढ़ने से ही मरीजों को स्ट्रोक के बाद रिकवरी में मदद मिलेगी.

स्ट्रोक के बाद रिकवरी के लिए क्या करें

स्ट्रोक के इलाज के बाद रिकवरी पीरियड शुरू होता है. इसके लिए सबसे जरूरी ये है कि डॉक्टर ने आपको जो एक्सरसाइज बताई हैं और जोहाथपैर की मूवमेंट के लिए फिजियोथेरेपी बताई हैं उनको करें. अगर किसी व्यक्ति को बोलने या खाने में दिक्कत हो रही है तो ईएनटी के डॉक्टर से सलाह लें. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लें. रेगुलर चेकअप जरूरी है.

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