
नई दिल्ली/वाराणसी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ी योजना सामने आई है। केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की योजना शामिल की है। इसके पूरा होने पर दिल्ली से काशी का सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इस कॉरिडोर से आगरा, कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज जैसे शहरों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। <Cite refs={[“turn226404search0″,”turn226404search1”]}/>
दिल्ली से काशी पहुंचने में लगेंगे करीब 3 घंटे 50 मिनट
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, योजना के तहत दिल्ली से आगरा का सफर करीब 58 मिनट, कानपुर का 1 घंटा 50 मिनट, लखनऊ का लगभग 2 घंटे 12 मिनट और वाराणसी का करीब 3 घंटे 33 मिनट में पूरा करने का अनुमान है।
वहीं, रेल मंत्रालय की बजट संबंधी जानकारी में दिल्ली-वाराणसी के बीच यात्रा का अनुमानित समय करीब 3 घंटे 50 मिनट बताया गया है। यह समय परियोजना की योजना पर आधारित है, वास्तविक समय अंतिम रूट और परिचालन व्यवस्था के बाद स्पष्ट होगा। <Cite refs={[“turn226404search0″,”turn226404search5”]}/>
वाराणसी से सिलीगुड़ी तक भी बनेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर
योजना में वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके जरिए वाराणसी से सिलीगुड़ी की यात्रा करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन कॉरिडोरों से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन आसान होने के साथ व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गंगा पर बनेगा छह लेन सड़क और चार रेल लाइनों वाला पुल
वाराणसी में गंगा नदी पर पुराने मालवीय पुल के पास एक नए रेल-सड़क पुल का निर्माण भी किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 2,642 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुल के ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क और निचले हिस्से में चार रेल लाइनें होंगी।
इस परियोजना का उद्देश्य वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच रेल यातायात की क्षमता बढ़ाना और मौजूदा रेल मार्ग पर दबाव कम करना है। परियोजना को अक्टूबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। <Cite refs={[“turn725633search4″,”turn725633search8″,”turn725633search16”]}/>
100 से ज्यादा ट्रेनों के संचालन में मिल सकती है मदद
नए पुल और रेल लाइनों के तैयार होने से वाराणसी तथा आसपास के क्षेत्रों में रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी। इससे पूर्वांचल और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों को भी फायदा मिल सकता है। मौजूदा रेल मार्ग पर दबाव कम होने से भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बुलेट ट्रेन का किराया कितना होगा?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि बुलेट ट्रेन को केवल अमीरों तक सीमित रखने का इरादा नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि इसका किराया हवाई जहाज के टिकट से कम रखने की योजना है, ताकि मध्यम वर्ग और आम यात्री भी इसका लाभ उठा सकें। हालांकि, दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर का आधिकारिक किराया अभी घोषित नहीं हुआ है।
Satya Report Disclaimer: यह लेख रेल मंत्रालय की बजट संबंधी जानकारी और उपलब्ध परियोजना रिपोर्टों पर आधारित है। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल योजना है। इसके निर्माण, अंतिम रूट, किराये और संचालन की समयसीमा से जुड़ी जानकारी आगे के सरकारी फैसलों के अनुसार बदल सकती है।



