अक्षय तृतीया पर अष्टलक्ष्मी पूजन करने का बहुत महत्व है. इस दिन अष्टलक्ष्मी की उपासना से धन, धान्य, संतान, विजय, ज्ञान, वीरता और ऐसे ही अन्य अक्षय आशीर्वाद प्राप्त होते हैं. इस लेख में हम जानेंगे कि अष्टलक्ष्मी के सभी 8 स्वरूप की उपासना से क्या-क्या लाभ होते हैं.
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Satya Report: (AI Photo)
Akshaya Tritiya Par Ashta Laxmi Puja: अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने का बहुत महत्व है लेकिन इस दिन को और प्रभावशाली बनाना है तो आप माता लक्ष्मी के अष्टलक्ष्मी स्वरूप की पूजा कर सकते हैं. ऐसा कर आप एक साथ अष्टलक्ष्मी के सभी आठ स्वरूपों की कृपा पा सकते हैं. मन की शांति, धन, धान्य, विजय, धैर्य से लेकर वैभव, संतान सुख और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अक्षय तृतीय का दिन अति शुभ है. आइए इस लेख में जानें कि अष्टलक्ष्मी के सभी 8 स्वरूप की पूजा कर माता से क्या आशीर्वाद और पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही जानेंगे 19 अप्रैल 2026 को पड़ने वाले अक्षय तृतीय पर्व के दिन का पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, योग और पूजा की विधि क्या है.
अक्षय तृतीया 2026 का शुभ मुहूर्त
अक्षय तृतीया इस साल 19 अप्रैल 2026, दिन रविवार को है. हालांकि अक्षय तृतीया पर अबुझ मुहूर्त होता है यानी किसी भी समय इस दिन पूजा पाठ, शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. इसे ऐसे समझें कि पूरे दिन में बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य कर सकते हैं. इसी के साथ इस दिन अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा कर सकते हैं. दोपहर 12:00 बजे से लेकर दोपहर 12:51 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है. हालांकि जगह स्थान आदि के हिसाब कुछ मिनट कम ज्यादा हो सकते हैं.
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:00 बजे से – दोपहर 12:51 बजे तक.
अमृत काल – तड़के प्रातः 02:26 बजे से –तड़के प्रातः 03:51 बजे तक.
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:29 बजे से बजे से–सुबह 05:17 बजे तक.
अक्षय तृतीया 2026 का शुभ योग
आयुष्मान- 18 अप्रैल रात 11:55 बजे से – 19 अप्रैल रात 08:01 बजे तक.
सौभाग्य – 19 अप्रैल रात 08:01 बजे से – 20 अप्रैल शाम 04:11 बजे तक.
अक्षय तृतीया 2026 पर मां अष्टलक्ष्मी की पूजा विधि (Lakshmi Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. पीले या लाल वस्त्र पहनें.
पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें.
अब चौकी स्थापित कर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
चौकी पर मां अष्टलक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.
चौकी पर ही पास में श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र को भी स्थापित करें.
लाल गुलाब या कमल का फूल, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत मां को चढ़ाएं.
हल्दी की गांठ और 11 या 5 पीली कौड़ियां भी चढ़ाएं.
दूध से बनी खीर, बताशे या मखाने का मां को भोग लगाएं.
शुद्ध घी के 8 दीपक जलाकर मां लक्ष्मी के सामने रखें.
मां का ध्यान कर 11 या 21 बार मंत्र जाप करें.
मंत्र है- “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः”
श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं.
आरती कर पूजा संपन्न करें और भक्तों में प्रसाद बांटें.
अक्षय तृतीया पर जानें अष्टलक्ष्मी के 8 स्वरूपों की महिमा-
1. आदिलक्ष्मी (Adi Lakshmi)
माता लक्ष्मी का पहला स्वरूप मां आदिलक्ष्मी हैं जिनकी चार भुजा है. माता के इस रूप की पूजा करने से साधक सभी सुख और अथाह धन की प्राप्ति करता है. भक्त को माता धर्म और मोक्ष का आशीर्वाद भी देती हैं.
2. धन लक्ष्मी (Dhana Lakshmi)
माता लक्ष्मी का दूसरा स्वरूप लाल वस्त्र धारण किए हुए मां धन लक्ष्मी हैं जिनकी 6 भुजाएं हैं जिनमें माता चक्र, शंख, धनुष-बाण, अमृतकलश और कमल धारण करती है. माता इस रूप में भक्त को धन का आशीर्वाद देती हैं.
3. (Dhanya Lakshmi)
माता लक्ष्मी का तीसरा स्वरूप आठ भुजाओं वालीमां धान्यलक्ष्मी हैं जो धान्य यानि अन्न प्राप्ति का आशीर्वाद देती है. मां धान्य लक्ष्मी की साधना जिस घर में होती वहां अन्न का भंडार भरा रहता है.
4. गजलक्ष्मी (Gaja Lakshmi)
माता लक्ष्मी का चौथा स्वरूप मां गजलक्ष्मी हैं जो हाथी की सवारी करती है और साधक को राज सुख का आशीर्वाद देती है. माता की उपासना कर सत्ता का सुख प्राप्त होका है और राजनीति में नाम होता है. मां गजलक्ष्मी की पूजा कर किसान अच्छी फसल पाते हैं.
5. संतान लक्ष्मी (Santan Lakshmi)
माता लक्ष्मी का पांचवां स्वरूप छह हाथों वाली मां संतान लक्ष्मी का है. सुंदर-गुणी संतान प्राप्ति के लिए माता संतान लक्ष्मी की उपासना की जाती है. मां संतान लक्ष्मी की उपासना और आशीर्वाद से प्राप्त संतान सुखी-संपन्न और सफल जीवन जीती है.
6. वीर लक्ष्मी (Veera Lakshmi)
माता लक्ष्मी का छठा स्वरूप मां वीर लक्ष्मी हैं जो अपने साधक को ताकत और आत्मविश्वास प्राप्ति का आशीर्वाद देती है. अकाल मृत्यु का भय दूर करती है. नहीं सताता है. माता वीर लक्ष्मी को मां कात्यायनी का ही पावन स्वरूप माना गया है.
7. विजय लक्ष्मी (Vijaya Lakshmi)
माता लक्ष्मी का सातवां स्वरूप मां विजय लक्ष्मी हैं जो अपने साधकों को विजय होने का आशीर्वाद देती हैं. कोर्ट-कचहरी जैसे जटिल मामलों से छुटकारा पाने के लिए और जीत के लिए मां विजय लक्ष्मी की उपासना करना कारगर बताया जाता है.
8. विद्या लक्ष्मी (Vidya Lakshmi)
माता लक्ष्मी का आठवां स्वरूप मां विद्या लक्ष्मी की उपासना कर साधक बुद्धि, विवेक और ज्ञान का आशीर्वाद पा सकते हैं. कला के क्षेत्र में धन और यश प्राप्ति के लिए साधक साधक विद्या लक्ष्मी की उपासना कर सकते हैं.
(Disclaimer- प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए धन्यवाद. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है .