
बदलते मौसम, बढ़ती उम्र और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण घुटनों और जोड़ों में दर्द की समस्या कई लोगों को परेशान करती है। ऐसे में लोग राहत के लिए आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली कई औषधीय वनस्पतियों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में हरसिंगार, जिसे पारिजात या नाइट जैस्मिन भी कहा जाता है, का नाम शामिल है। आयुर्वेद में इसके पत्तों का इस्तेमाल खासतौर पर जोड़ों से जुड़ी तकलीफों और सूजन जैसी समस्याओं के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। हरसिंगार का वैज्ञानिक नाम Nyctanthes arbor-tristis है। यह एक छोटा पेड़ या झाड़ीदार पौधा होता है, जिसकी ऊंचाई आमतौर पर करीब 10 से 15 फीट तक हो सकती है। इसके छोटे सफेद फूलों के बीच नारंगी रंग की डंडी होती है और इनमें रात के समय तेज खुशबू आती है, इसलिए इसे Night Jasmine भी कहा जाता है। सुबह इसके फूल जमीन पर गिरे हुए दिखाई देते हैं।
हरसिंगार के पत्ते, फूल, बीज और छाल का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अलग-अलग तरह से किया जाता रहा है। इसके पत्तों में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिन पर सूजन और दर्द से जुड़े प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक शोध भी किए गए हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया परिजात के पत्ते जोड़ों के दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस और साइटिका में बेहद असरदार होता है। आप इस जड़ी बूटी के पत्तों का रस निकालकर, उनका काढ़ा बनाकर उसका सेवन कर सकते हैं। लेकिन इसकी सही मात्रा, सेवन की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर इसका इस्तेमाल अलग हो सकता है। इसलिए लंबे समय तक या किसी बीमारी के इलाज के तौर पर हरसिंगार की पत्तियों का सेवन डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ये पत्ते सेहत को कौन-कौन से फायदे पहुंचाते हैं।
जोड़ों के दर्द और सूजन में है मददगार
हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में पारंपरिक रूप से किया जाता है। इसके पौधे में कुछ ऐसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं जिनमें anti-inflammatory और analgesic यानी दर्द कम करने वाले गुण मौजूद है।
हर तरह के बुखार का रामबाण इलाज हैं ये पत्ते
बुखार के प्राकृतिक उपचार में हरसिंगार का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए इसके पत्ते को पीसकर गर्म पानी में मिलाकर पिया जाता है। इससे सामान्य बुखार से लेकर चिकनगुनिया, डेंगू, इन्सेफेलाइटिस, ब्रेन मलेरिया तक किसी भी तरह के बुखार को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में हरसिंगार की पत्तियों का इस्तेमाल बुखार से जुड़ी कुछ स्थितियों में किया जाता रहा है।
घावों को भरने में भी है असरदार
हरसिंगार में घावों को भरने की अद्वितीय क्षमता होती है। औषधीय गुणों से भरपूर हरसिंगार के पत्तों को पीसकर उसका लेप बनाएं और उसे चोट वाली जगह पर लगाएं तो घाव जल्दी भरते हैं।
सूखी खांसी में पारंपरिक इस्तेमाल
हरसिंगार की पत्तियों का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में खांसी और सांस से जुड़ी कुछ परेशानियों के लिए किया जाता रहा है। इसके पत्तों में मौजूद कुछ यौगिकों पर इसके संभावित औषधीय प्रभावों को लेकर अध्ययन हुए हैं। खांसी का इलाज करने के लिए आप इन पत्तों का काढ़ा बनाकर उसका सेवन कर सकते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट गुण
हरसिंगार के विभिन्न हिस्सों में फ्लेवोनॉयड्स और फाइटोकेमिकल्स जैसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में इसके अर्क में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। ये यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़े प्रभावों को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि हरसिंगार किसी गंभीर बीमारी को रोक या ठीक कर सकता है।
त्वचा से जुड़ी समस्याओं में पारंपरिक उपयोग
हरसिंगार की पत्तियों और अन्य हिस्सों का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में कुछ स्किन से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता रहा है। इसके अर्क में एंटीमाइक्रोबियल और एंटी इंफ्लामेटरी गुण मौजूद होते हैं जो स्किन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी हरसिंगार के पारंपरिक उपयोग और उपलब्ध शोध पर आधारित है। इसे किसी बीमारी का इलाज न मानें। हरसिंगार का सेवन या इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



