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TGT-2022: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों और उत्तरकुंजी को लेकर HC पहुंचा मामला, कोर्ट ने UPESSC से मांगा जवाब

High Court Petition TGT2022 Result: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा टीजीटी2022 अंग्रेजी विषय भर्ती परीक्षा का परिणाम अंतिम उत्तरकुंजी जारी किए बिना घोषित किए जाने के मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने आयोग से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।

TGT-2022: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों और उत्तरकुंजी को लेकर HC पहुंचा मामला, कोर्ट ने UPESSC से मांगा जवाब
TGT-2022: आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों और उत्तरकुंजी को लेकर HC पहुंचा मामला, कोर्ट ने UPESSC से मांगा जवाब

चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि टीजीटी2022 अंग्रेजी विषय की परीक्षा में कुल 37 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए थे, जबकि चार प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के बाद इन आपत्तियों को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उनका निस्तारण सार्वजनिक रूप से किए बिना ही परिणाम घोषित कर दिया गया। साथ ही अंतिम उत्तरकुंजी भी जारी नहीं की गई, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभ्यर्थियों के अधिकारों का उल्लंघन का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि अंतिम उत्तरकुंजी जारी किए बिना परिणाम घोषित करना अभ्यर्थियों के अधिकारों का उल्लंघन है। अभ्यर्थियों को यह जानने का अवसर मिलना चाहिए कि उनकी आपत्तियों पर आयोग ने क्या निर्णय लिया और किन आधारों पर परिणाम तैयार किया गया। उनका तर्क है कि यदि उत्तरकुंजी सार्वजनिक होती तो उम्मीदवार अपने अंकों और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता का मूल्यांकन कर सकते थे।

सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने से समय मांगा। उन्होंने कहा कि विवादित प्रश्नों तथा पाठ्यक्रम से बाहर बताए गए प्रश्नों के संबंध में आयोग से निर्देश प्राप्त कर विस्तृत पक्ष रखा जाएगा। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए आयोग को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की एकल पीठ ने आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। माना जा रहा है कि अदालत का फैसला भर्ती प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यदि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां सही पाई जाती हैं, तो आयोग को परिणाम की समीक्षा, संशोधित उत्तरकुंजी जारी करने अथवा चयन प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

इस मामले पर हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि अदालत का निर्णय भर्ती के अंतिम स्वरूप और चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

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