BusinessIndiaTrending

बदला कॉर्पोरेट का मिजाज! कम बजट-काम ज्यादा, कैसे दी जा रही मंदी को चुनौती

इंडिया इंक यानी भारतीय कॉरपोरेट अब वित्तीय समझदारी और संसाधनों के सही इस्तेमाल पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. इसका कारण भी है. जियो पॉलिटिकज अनिश्चितताओं और दुनिया भर में होने वाली संभावित रुकावटों की वजह से कंपनियां अब सावधानी बरतने लगी हैं. सभी सेक्टर की कंपनियां अब गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर रही हैं, गैरजरूरी यात्राओं पर रोक लगा रही हैं. हाइब्रिड और रिमोट वर्क को बढ़ावा दे रही हैं, और ऊर्जा बचाने के उपायों को तेज कर रही हैं.

बदला कॉर्पोरेट का मिजाज! कम बजट-काम ज्यादा, कैसे दी जा रही मंदी को चुनौती
बदला कॉर्पोरेट का मिजाज! कम बजट-काम ज्यादा, कैसे दी जा रही मंदी को चुनौती

ऐसा वे न सिर्फ मौजूदा उतारचढ़ाव से निपटने के लिए कर रही हैं, बल्कि अपने कामकाज को मजबूत बनाए रखने के लिए भी कर रही हैं. कंपनियों का कहना है कि ये कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के अनुरूप हैं, जिसमें उन्होंने उत्पादकता और लंबे समय तक चलने वाली ग्रोथ को बनाए रखते हुए संयम बरतने और जिम्मेदारी से उपभोग करने की बात कही थी.

वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा

इंडसइंड बैंक अब रोस्टरबेस्ड ‘वर्क फ्रॉम ​होम’ की पॉलिसी का विस्तार कर रहा है, जबकि ल्यूपिन ने ट्रैवल की मंजूरी देने के नियमों को और सख्त कर दिया है. पीडब्ल्यूसी इंडिया ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे तभी ट्रैवल करें, जब वह बहुत ज़रूरी हो. होमलेन अब ज्यादा कार्यकुशलता लाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है. कैपजेमिनी, इंफोसिस, आरपीजी और एचयूएल अब रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वर्चुअल सहयोग और IoTबेस्ड एनर्जी मैनेज्मेंट के जरिए अपने सस्टेनेबिलिटी उपायों को और मजबूत बना रहे हैं.

इंडसइंड बैंक के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर अमिताभ कुमार सिंह ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि संसाधनों को बचाने और कार्यकुशलता को बढ़ावा देने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और वर्चुअल सहयोग पर भारत के व्यापक जोर के अनुरूप, हमारा बैंक भी चुनिंदा टीमों में सफल प्रयोग के बाद अब कई विभागों में अपने रोस्टरबेस्ड ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ढांचे का विस्तार कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि हमने लगातार ऐसे कदम उठाए हैं, जो संसाधनों के सही इस्तेमाल और कामकाज की प्रभावशीलता पर केंद्रित रहे हैं.

ट्रैवल में कटौती

हालांकि, कई कंपनियों के पास पहले से ही अपने कर्मचारियों के लिए एक लचीली और हाइब्रिड रणनीति मौजूद है, लेकिन अब कमर्शियल ट्रैवल पर पहले से कहीं ज़्यादा बारीकी से नजर रखी जा रही है. दवा बनाने वाली बड़ी कंपनी ल्यूपिन के प्रेसिडेंट यशवंत महादिक ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि​ उनकी कंपनी ने अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर सख्ती बढ़ा दी है, और अब सिर्फ बेहद जरूरी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ही यात्रा की अनुमति दी जा रही है. RPG ग्रुप भी अपनी यात्राओं को लेकर बेहद सख़्त है.

वे विदेश यात्राओं को कम से कम कर रहे हैं, घरेलू हवाई यात्राओं में काफी कटौती कर रहे हैं, और ऐसी बैठकों से बच रहे हैं या उन्हें कम कर रहे हैं, जिनके लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना ज़रूरी होता है. PwC India ने भी अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे अपनी सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं की समीक्षा करें, और यात्रा तभी करें, जब उसकी कोई स्पष्ट व्यावसायिक जरूरत हो. HUL भी जहां तक संभव हो, बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम का इस्तेमाल करने को बढ़ावा देता है.

ट्रेन कनेक्टिविटी के इस्तेमाल को बढ़ावा

HomeLane में संबंधित विभागों में हाइब्रिड और ‘वर्क फ्रॉम होम’ की व्यवस्था पहले से ही एक स्थापित चलन है, लेकिन इस होम इंटीरियर डिजाइन कंपनी ने अब व्यावसायिक यात्राओं को भी तर्कसंगत बनाया है, और जहां भी संभव हो, वहां वर्चुअल माध्यम से जुड़ने को प्राथमिकता दी है. HomeLane के को फाउंडर श्रीकांत अय्यर ने कहा कि जरूरी यात्राओं के लिए, हमने छोटी दूरी की फ्लाइट्स के बजाय ट्रेन कनेक्टिविटी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है.

इससे न सिर्फ फ्यूल की खपत कम होती है, बल्कि यात्रा के खर्च में भी काफ़ी बचत होती है. इसके अलावा, हम फैसले लेने की कई प्रक्रियाओं को डिसेंट्रलाइज कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, नए स्टोर खोलने और जगह चुनने के फैसले अब स्थानीय टीमें ले रही हैं, जिससे सीनियर कर्मचारियों को शहर से बाहर यात्रा करने की जरूरत नहीं पड़ती.

कैपजेमिनी भी अपनी मोबिलिटी व्यवस्था को तेजी से इलेक्ट्रिक बना रही है, और उसके वाहनों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहन की संख्या काफी ज्यादा है. कंपनी के एक एक प्रवक्ता ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हम अपने Energy Command Centre जैसी पहलों के जरिए अपनी परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत कर रहे हैं. यह सेंटर IoTआधारित निगरानी का इस्तेमाल करके हमारे सभी परिसरों में ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाता है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply