
सीतापुर, अमृत विचार: इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत के 40वें के तौर पर मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला। पुराने शहर स्थित बड़े इमामबाड़े से उठे जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। सीतापुर के पुराने शहर स्थित बड़े इमामबाड़े से निकला जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होते हुए कजियारा चौराहा, पटिया और अन्य प्रमुख रास्तों से गुजरकर हाजी साहब की कर्बला पहुंचा।
जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने नौहाख्वानी की और सीनाज़नी कर कर्बला के शहीदों को याद किया। गमगीन माहौल में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। कर्बला पहुंचने पर इमाम हुसैन और उनके छह माह के पुत्र जनाबे अली असगर के ताबूत की जियारत के लिए अकीदतमंद उमड़ पड़े। ताबूत को लहद की ओर ले जाते समय अकीदतमंद फफक पड़े। इसके बाद ताजियों और ताबूत को सुपुर्दएलहद किया गया।
रास्ते भर अकीदतमंदों के लिए ठंडे पानी और खानेपीने की सबीलें लगाई गई थीं। जुलूस के साथ नगर कोतवाली पुलिस और रेलवे पुलिस के जवान हमराह रहे। महमूदाबाद सहित अन्य स्थानों पर भी बड़ी संख्या में जुलूस में अकीदतमंद शामिल रहे।
ऊंट, दुलदुल और ताजियों के साथ निकला चेहल्लुम का शाही जुलूस
महमूदाबाद कस्बे में कर्बला के शहीदों की याद में प्रो. अली खान के नेतृत्व में किला से परंपरागत चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में अलम, ऊंट, दुलदुल, ताबूत और ताजिए विशेष रूप से रहे। अंजुमनों ने नौहाख्वानी, सोजख्वानी और मातम कर शहीदएकर्बला को खिराजएअकीदत पेश की।
स्याह लिबास में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस शिया इमामिया मस्जिद पहुंचा, जहां जोहर की नमाज अदा की गई। इसके बाद जुलूस अमीरगंज स्थित कर्बला पहुंचा, जहां गमगीन माहौल में ताबूत और ताजिए सुपुर्दएखाक किए गए।



