
बच्चों की सेहत और खुशियों को लेकर माता-पिता हमेशा चिंतित रहते हैं। कई बार बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाता है, ज्यादा रोने लगता है या उसकी दिनचर्या में बदलाव दिखाई देने लगता है। ऐसे में परिवार के बड़े-बुजुर्ग कई बार इसे बुरी नजर लगने से जोड़ते हैं और नजर उतारने के पारंपरिक उपाय बताते हैं।
भारतीय परिवारों में नमक, पानी, कलावा और नींबू-मिर्च जैसी चीजों से नजर उतारने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। ज्योतिष और लोक मान्यताओं में इन उपायों को विशेष महत्व दिया जाता है। आइए जानते हैं बच्चों की नजर उतारने के 6 प्रचलित पारंपरिक तरीके।
1. नमक से उतारते हैं नजर
नमक से नजर उतारने का तरीका कई परिवारों में प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, थोड़ा-सा नमक लेकर बच्चे के सिर से पैर तक सात बार घुमाया जाता है। इसके बाद नमक को पानी में बहा दिया जाता है।
लोक मान्यता में इसे बुरी नजर के प्रभाव को दूर करने का एक पारंपरिक उपाय माना जाता है।
2. कलावा बांधने की परंपरा
कलावा या रक्षा सूत्र को धार्मिक मान्यताओं में सुरक्षा और मंगल का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में पूजा-पाठ के बाद बच्चे की कलाई पर कलावा बांधा जाता है।
मान्यता है कि भगवान का स्मरण करते हुए बांधा गया रक्षा सूत्र बच्चे को नकारात्मक प्रभावों से बचाने का प्रतीक होता है। हालांकि, इसे बच्चे की कलाई पर बहुत कसकर न बांधें और असुविधा होने पर तुरंत हटा दें।
3. पानी से नजर उतारने का तरीका
कुछ परिवारों में साफ पानी से भी नजर उतारने की परंपरा है। इसके लिए एक लोटे में पानी लेकर बच्चे के सिर से पैर तक सात बार घुमाया जाता है। इसके बाद उस पानी को घर से बाहर फेंक दिया जाता है।
यह तरीका भी लोक परंपराओं में प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसकी विधि अलग हो सकती है।
4. सूखी लाल मिर्च से नजर उतारना
सूखी लाल मिर्च से नजर उतारने का तरीका भी कई घरों में अपनाया जाता है। पारंपरिक विधि में कुछ सूखी मिर्च लेकर बच्चे के ऊपर से सात बार वारने की मान्यता है। इसके बाद मिर्च को जलाने की परंपरा भी कुछ जगहों पर प्रचलित है।
हालांकि, बच्चे के आसपास मिर्च जलाने से धुआं और तीखी गंध फैल सकती है। इससे बच्चे की आंखों और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए बच्चे के पास मिर्च न जलाएं।
5. नींबू-मिर्च से जुड़ी मान्यता
नींबू और हरी मिर्च का इस्तेमाल भारतीय परंपराओं में नजर से बचाव के लिए किया जाता रहा है। कुछ परिवारों में इन्हें बच्चे के सिर से पैर तक सात या इक्कीस बार घुमाने के बाद घर से बाहर रखने की परंपरा है।
इसे बुरी नजर से बचाव का प्रतीकात्मक उपाय माना जाता है। इस प्रक्रिया में नींबू या मिर्च को बच्चे के शरीर से न रगड़ें और इस्तेमाल के बाद उन्हें बच्चे की पहुंच से दूर रखें।
6. कपूर से नजर उतारने की परंपरा
कई परिवारों में पूजा के दौरान कपूर जलाकर आरती करने की परंपरा है। कुछ लोग कपूर को नजर उतारने से भी जोड़ते हैं। मान्यता के अनुसार, कपूर जलाकर बच्चे की नजर उतारी जाती है।
लेकिन कपूर जलाते समय विशेष सावधानी जरूरी है। इसे बच्चे से दूर, हवादार जगह पर ही जलाएं। आग और धुएं को बच्चे के चेहरे या शरीर के पास न ले जाएं।
बच्चे की तबीयत बिगड़े तो नजर मानकर इलाज न टालें
बच्चों का बार-बार रोना, चिड़चिड़ापन, बुखार या खाना कम खाना कई कारणों से हो सकता है। इसे केवल बुरी नजर का असर मानना सही नहीं है। यदि बच्चे की तबीयत लगातार खराब हो रही है, बुखार है, वह दूध या पानी नहीं पी रहा है या असामान्य व्यवहार कर रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
Satya Report: नजर उतारने के ये तरीके पारंपरिक लोक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बच्चे की सेहत से जुड़ी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।



