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देखता रह गया चीन, भारत की इस कंपनी ने अमेरिका में घुसकर कर ली 7175 करोड़ की डील

वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. अमेरिका जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी बाजार में जहां एक तरफ कड़े नियमों के चलते चीनी कंपनियों के लिए राह मुश्किल हो रही है, वहीं भारतीय उद्यम तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं. नोएडा मुख्यालय वाली प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी आईनॉक्स क्लीन एनर्जी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए अमेरिका में एक चीनी कंपनी की सोलर मैन्युफैक्चरिंग संपत्तियों का अधिग्रहण कर लिया है.

देखता रह गया चीन, भारत की इस कंपनी ने अमेरिका में घुसकर कर ली 7175 करोड़ की डील
देखता रह गया चीन, भारत की इस कंपनी ने अमेरिका में घुसकर कर ली 7175 करोड़ की डील

7175 करोड़ की यह ऐतिहासिक डील क्यों है खास?

आईनॉक्स ग्रुप की इस ऊर्जा कंपनी ने लगभग 750 मिलियन डॉलर खर्च कर अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित ग्रीनविले में मौजूद ‘बोविएट सोलर’ की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को खरीदा है. इन फैक्ट्रियों में मुख्य रूप से सोलर मॉड्यूल और सेल बनाए जाते हैं. अधिग्रहित संपत्ति की कुल उत्पादन क्षमता 6 गीगावाट है. बोविएट सोलर का मालिकाना हक मूल रूप से शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड चीनी कंपनी ‘निंग्बो बोवे अलॉय’ के पास था. निंग्बो वही कंपनी है जो बीवाईडी जैसी मशहूर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों को अलॉय की सप्लाई करती है. इस बड़े सौदे के लिए पिछले दो महीनों से विनिवेश की बातचीत चल रही थी. इस बिक्री प्रक्रिया में जेपी मॉर्गन ने सलाहकार की भूमिका निभाई. अब यह पूरी संपत्ति ‘आईनॉक्स सोलर अमेरिका एलएलसी’ के जरिए भारतीय कंपनी के नियंत्रण में आ जाएगी.

अमेरिकी बाजार पर आईनॉक्स की पैनी नजर

आईनॉक्स ने अमेरिका में ही इतना बड़ा निवेश क्यों किया? इसके पीछे की अर्थनीति को समझना जरूरी है. वर्तमान में अमेरिका में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भारी विस्तार हो रहा है, जगहजगह विशाल डेटा सेंटर बन रहे हैं. इन सभी ढांचागत और तकनीकी बदलावों के लिए भारी मात्रा में स्वच्छ ऊर्जा की दरकार है. आईनॉक्स जीएफएल के कार्यकारी निदेशक देवांश जैन का मानना है कि अमेरिका में ऊर्जा की इस बढ़ती मांग को भुनाने का यह सबसे उपयुक्त समय है. यह कदम कंपनी की “मेक इन अमेरिका, फॉर अमेरिका” रणनीति का एक अहम हिस्सा है. इस सौदे से आईनॉक्स को अमेरिकी सरकार की तरफ से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली योजना का सीधा फायदा मिलेगा. इससे कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा, साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से विदेशी नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं भी खत्म हो जाएंगी.

चीन की मजबूरी बन गई भारत की बड़ी कामयाबी

दरअसल, ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका में विदेशी संस्थाओं से जुड़े नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया था. चीन की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को ‘फॉरेन एंटिटी ऑफ कंसर्न’ की काली सूची में डाल दिया गया है. इस सूची में रूस, ईरान, उत्तर कोरिया जैसे देशों की संस्थाएं शामिल हैं. इस प्रतिबंध के कारण चीनी कंपनियों को अमेरिका में कोई भी टैक्स छूट या सरकारी मदद नहीं मिल पा रही थी. बिना सरकारी इंसेंटिव के वहां टिकना मुश्किल हो रहा था. इसी भूराजनैतिक बदलाव का फायदा उठाते हुए आईनॉक्स ने इस तैयार मंच को अपने नाम कर लिया. आईनॉक्स के ग्रुप सीएफओ अखिल जिंदल के मुताबिक, बाजार में सोलर सेल की कमी के बीच यह अधिग्रहण कंपनी को भारी मुनाफा कमाने का एक बेहतरीन इकोसिस्टम प्रदान करेगा.

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