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चीन​​​ के पुरुष भारतीयों से औसतन 9 सेंटीमीटर​​​​​​ लंबे क्यों? पाकिस्तान भी निकला आगे, रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली वजह

चीन​​​ के पुरुष भारतीयों से औसतन 9 सेंटीमीटर​​​​​​ लंबे क्यों? पाकिस्तान भी निकला आगे, रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली वजह

नई दिल्ली, भारत: भारत, पाकिस्तान और चीन की तुलना अक्सर अर्थव्यवस्था, खानपान और जीवनशैली को लेकर होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन देशों के पुरुषों की औसत लंबाई में इतना अंतर क्यों है? एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि चीन के 19 वर्षीय लड़कों की औसत लंबाई भारतीय युवाओं से करीब 9.2 सेंटीमीटर ज्यादा है। वहीं पाकिस्तान के युवा भी इस मामले में भारतीयों से थोड़े आगे हैं। इसके पीछे सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि बचपन का पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और आनुवंशिकता जैसे कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं।

रिसर्च में क्या सामने आया?

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में 2020 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन के अनुसार, 19 साल के युवाओं की औसत लंबाई में तीनों देशों के बीच अंतर देखा गया।

अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक:

  • चीन: 175.7 सेंटीमीटर
  • पाकिस्तान: 167.3 सेंटीमीटर
  • भारत: 166.5 सेंटीमीटर

यानी औसतन चीनी युवा भारतीयों से 9.2 सेंटीमीटर लंबे हैं। वहीं पाकिस्तान और भारत के बीच यह अंतर सिर्फ 0.8 सेंटीमीटर है।

इस अध्ययन में 1985 से 2019 के बीच 200 देशों और क्षेत्रों के 6.5 करोड़ से अधिक लोगों पर किए गए 2,181 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था।

चीन में युवाओं की लंबाई बढ़ने की क्या रही वजह?

चीन में पिछले कुछ दशकों के दौरान आर्थिक विकास के साथ लोगों के खानपान और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव आया है। बच्चों को बेहतर पोषण, प्रोटीनयुक्त भोजन, साफ पानी और स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से उनके शारीरिक विकास को मदद मिली।

लैंसेट के अध्ययन के अनुसार, 1985 से 2019 के बीच चीन के 19 वर्षीय लड़कों की औसत लंबाई में करीब 8 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। इससे पता चलता है कि बचपन और किशोरावस्था में बेहतर जीवन परिस्थितियां शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या पाकिस्तान में भारतीयों से बेहतर खानपान है?

पाकिस्तान के पुरुषों की औसत लंबाई भारतीयों से थोड़ी अधिक जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां पोषण की स्थिति बेहतर है। पाकिस्तान में भी बच्चों के बीच कुपोषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है।

यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में पांच साल से कम उम्र के करीब 40 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित हैं। इसका मतलब है कि उनकी उम्र के हिसाब से लंबाई कम है।

भारत में भी स्थिति पूरी तरह बेहतर नहीं है। NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, देश में पांच साल से कम उम्र के 35.5 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग की समस्या से प्रभावित थे।

इसलिए भारत और पाकिस्तान के बीच औसत लंबाई का 0.8 सेंटीमीटर का अंतर केवल खानपान के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

बच्चों की लंबाई किन चीजों पर निर्भर करती है?

किसी व्यक्ति की लंबाई केवल उसके माता-पिता के कद पर निर्भर नहीं करती। इसमें कई महत्वपूर्ण कारक भूमिका निभाते हैं।

  1. आनुवंशिकता: माता-पिता से मिलने वाले जीन बच्चे की संभावित लंबाई तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  2. मां का पोषण: गर्भावस्था के दौरान मां को पर्याप्त पोषण मिलना बच्चे के विकास के लिए जरूरी है।
  3. बचपन का खानपान: प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व हड्डियों और शरीर के विकास में मदद करते हैं।
  4. स्वास्थ्य सुविधाएं: बचपन में संक्रमण और बीमारियों का समय पर इलाज न मिलने से शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है।
  5. साफ पानी और स्वच्छता: स्वच्छ वातावरण बच्चों को बार-बार होने वाले संक्रमण से बचाने में मदद करता है।

दक्षिण कोरिया की महिलाओं की लंबाई में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी

इस मामले में दक्षिण कोरिया का उदाहरण भी काफी दिलचस्प है। साल 2016 में जर्नल eLife में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, 1914 से 2014 के बीच दक्षिण कोरिया की महिलाओं की औसत लंबाई में करीब 20.2 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।

इसके पीछे बेहतर पोषण, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार जैसे कारणों को महत्वपूर्ण माना गया।

कुल मिलाकर, किसी देश के लोगों की औसत लंबाई वहां की आनुवंशिकता के साथ-साथ बचपन की पोषण संबंधी परिस्थितियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को भी दर्शाती है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच का मामूली अंतर किसी एक देश के बेहतर खानपान का प्रमाण नहीं है।

Satya Report Disclaimer: यह लेख उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय शोध और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों पर आधारित है। अलग-अलग देशों के सर्वेक्षणों और अध्ययन पद्धतियों के कारण आंकड़ों की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है।

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