
Jaipur murder case: जयपुर के प्रताप नगर इलाके में सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने हर किसी को हैरान कर दिया है. जिस मां ने पति की मौत के बाद बेटी को पढ़ाया, परिवार को संभाला और दिव्यांग बेटे की देखभाल की, उसी मां की मौत की साजिश रचने का आरोप उसकी अपनी बेटी पर लगा है. पुलिस के मुताबिक सरकारी नौकरी, करोड़ों की संपत्ति और पारिवारिक अधिकार हासिल करने की चाह में यह पूरी योजना बनाई गई थी.
पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी निरज
मामला जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाले परिवार से जुड़ा है. करीब ढाई वर्ष पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी पद पर कार्यरत विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने यहां अपना मकान बनवाया था. परिवार में उनकी पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से दिव्यांग बेटा रहते थे. करीब एक वर्ष पहले विजय शर्मा का निधन हो गया. उस समय आयुषी ने 12वीं की परीक्षा पास की थी. पति की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का बड़ा सवाल खड़ा हो गया था.
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद
विजय शर्मा की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा सामने आया. आयुषी स्वयं नौकरी करना चाहती थी और शुरुआत में उसकी मां भी इसके पक्ष में थीं. इसी दौरान निरज शर्मा के भाई, जो स्वयं लोअर कोर्ट में एलडीसी हैं, उन्होंने निरज को समझाया कि वह पढ़ी-लिखी हैं और परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं. दिव्यांग बेटे की देखभाल और घर की जरूरतों को देखते हुए निरज शर्मा ने अपने दिवंगत पति के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर ली. पुलिस के अनुसार यहीं से मां-बेटी के बीच तनाव बढ़ना शुरू हुआ.
मां के फैसले से नाराज होकर अलग रहने लगी आयुषी
पुलिस जांच के अनुसार मां द्वारा नौकरी स्वीकार किए जाने के बाद आयुषी नाराज हो गई. उसने एयरपोर्ट कॉलोनी का घर छोड़ दिया और कल्याण कॉलोनी स्थित अपने पिता के पुराने मकान में रहने लगी.
वहीं उसने अपने चचेरे भाई बलराम के साथ एलएलबी में दाखिला लिया. दोनों एक ही घर में रहने लगे. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी दौरान निरज शर्मा को रास्ते से हटाने की योजना तैयार की गई.
करोड़ों की जमीन और संपत्ति का लालच बना कथित वजह
पुलिस के अनुसार आयुषी ने कथित रूप से बलराम को साजिश में शामिल करने के लिए बड़ी संपत्तियों का लालच दिया. जांच में सामने आया कि आगरा रोड स्थित लगभग पांच करोड़ रुपये मूल्य की पांच बीघा जमीन और भरतपुर में करीब पांच करोड़ रुपये की चार बीघा जमीन का जिक्र किया गया. बताया गया कि मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के साथ-साथ जयपुर के दोनों मकानों पर भी उसका अधिकार हो सकता था. इसी आर्थिक लाभ को कथित तौर पर हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है.
एक महीने पहले भी हुई थी कुचलने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से लगभग एक महीने पहले निरज शर्मा को उनके घर के बाहर थार वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया था. हालांकि उस समय वह बच गई थीं. घटना के बाद उन्हें किसी खतरे का आभास हो गया था. उन्होंने अपने भाई को पूरी बात बताई और बाहर निकलना कम कर दिया. सुरक्षा के लिए घर में जालियां लगवाई गईं और बाहर चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए गए.
मां को घर से बाहर निकालने के लिए अपनाए गए कथित टोटके
पुलिस जांच में सामने आया कि सुरक्षा बढ़ने के बाद आरोपियों के लिए योजना को अंजाम देना मुश्किल हो गया. इसके बाद कथित तौर पर घर के बाहर नींबू-मिर्च, लाल सिंदूर और जलता हुआ नारियल फेंकने जैसी गतिविधियां शुरू की गईं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य निरज शर्मा को घर से बाहर निकलने के लिए मजबूर करना था ताकि उन पर हमला किया जा सके.
4 जुलाई को अंजाम दी गई साजिश
पुलिस के मुताबिक 4 जुलाई को निरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को लेकर फिजियोथेरेपिस्ट के पास गई थीं. इसी दौरान आयुषी ने उन्हें किसी जरूरी काम का हवाला देकर घर लौटने के लिए कहा. जब निरज वापस लौट रही थीं, तब 60 फीट रोड पर पहले से मौजूद हमलावरों ने कथित तौर पर स्कॉर्पियो वाहन से उन्हें टक्कर मार दी. इस घटना में उनकी मौत हो गई. शुरुआत में इसे सड़क हादसा माना गया, लेकिन जांच के दौरान मामला हत्या का निकला.
सड़क हादसा दिखाने की थी पूरी तैयारी
पुलिस के अनुसार पूरी साजिश इस तरह बनाई गई थी कि घटना एक सामान्य हिट एंड रन दुर्घटना लगे. जांच में यह भी सामने आया कि आयुषी, उसके चचेरे भाई बलराम और कुछ अन्य लोगों को कथित रूप से इस योजना की जानकारी थी. साजिश के तहत वाहन से कुचलकर हत्या करने का फैसला लिया गया ताकि किसी को शक न हो और मामला दुर्घटना मानकर बंद हो जाए.
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों ने खोली साजिश की परतें
हालांकि वारदात को दुर्घटना दिखाने की कोशिश ज्यादा दिन तक सफल नहीं हो सकी. पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की. जांच आगे बढ़ी तो हत्या के पीछे कथित पारिवारिक साजिश की परतें खुलती चली गईं. पुलिस ने कुछ ही दिनों में मामले का खुलासा कर दिया और आरोपियों को हिरासत में ले लिया.
गिरफ्तारी के बाद भी नहीं दिखा पछतावा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आयुषी के व्यवहार में किसी तरह का पछतावा दिखाई नहीं दिया. वह लगातार सवालों को टालती रही और कई बार उलझाने वाले जवाब देती रही. मीडिया से बातचीत की कोशिशों के दौरान भी उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कैमरे के सामने चुप्पी साधे रखी. पुलिस अब पूरे मामले में अन्य संभावित आरोपियों और साजिश से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है.



