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आगरा में जया किशोरी की कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भाव-विभोर हुए लोग

Jaya Kishori Bhagwat Katha In Agra: फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पूज्यश्री जया किशोरी की अमृतवाणी सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और राधाकृष्ण के दिव्य प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन हुआ कि पूरा कथा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया। “प्रथम करी हरि माखन चोरी…” और “राधिका गोरी से बिरज की छोरी से…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।

आगरा में जया किशोरी की कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भाव-विभोर हुए लोग
आगरा में जया किशोरी की कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भाव-विभोर हुए लोग

बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने का संदेश

पूज्यश्री जया किशोरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने का संदेश है। उन्होंने मातापिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों की छोटीछोटी बातों को भी गंभीरता से सुनें। जिस प्रकार माता यशोदा कान्हा की हर जिद और भावना को समझती थीं, उसी तरह अभिभावकों को भी बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए, क्योंकि छोटी बातों की अनदेखी भविष्य में बड़ी दूरियां पैदा कर सकती है।

गोवर्धन पूजा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

कथा के दौरान पूतना वध, माखन चोरी, ओखल लीला, शिवजी के कृष्ण दर्शन और गोवर्धन पूजा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। राधा और कन्हैया की वेशभूषा में सजे नन्हे बच्चों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और पूरा वातावरण वृंदावन जैसा प्रतीत हुआ।

अपने प्रवचन में जया किशोरी ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आज हम अपनी ही धरोहर पर तब विश्वास करते हैं, जब उस पर विदेशी मुहर लग जाती है।


पत्तल, गौउत्पाद, मंत्रोच्चार और जैसे अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं से अपने शास्त्रों को पढ़ने और भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुनिया आज जिन बातों को नई खोज बताकर अपना रही है, वे भारत में सदियों से जीवन का हिस्सा रही हैं।

परिवार व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि घर और समाज दोनों की मजबूती पतिपत्नी की साझा जिम्मेदारी से ही संभव है। बेटा हो या बेटी, दोनों को शिक्षा के साथसाथ घर के काम, आर्थिक जिम्मेदारियां और रिश्तों को निभाने की कला भी सीखनी चाहिए।

यही वास्तविक समानता और सफल पारिवारिक जीवन का आधार है। कथा में बाबू रोशनलाल गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, विकास मांगलिक, विनीत मांगलिक सहित श्रीश्याम परिवार के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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