Gorakhpur Cyber Fraud Fake Facebook ID: अगर आपको किसी आईपीएस अधिकारी की फेसबुक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट आए तो क्या आप उसे बिना सोचेसमझे स्वीकार कर लेंगे? गोरखपुर में ठीक यही हुआ। लेकिन एक जागरूक व्यापारी की सतर्कता ने साइबर ठगों की पूरी साजिश पर पानी फेर दिया। हैरानी की बात यह है कि ठगों ने गोरखपुर में तैनात रह चुके एक आईपीएस अधिकारी की फर्जी आईडी बनाकर लाखों नहीं, बल्कि भरोसा लूटने की कोशिश की।

ठगी के लिए आईपीएस अधिकारियों की पहचान का भी इस्तेमाल
साइबर अपराध अब केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। ठग अब वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की पहचान का भी बेखौफ इस्तेमाल कर रहे हैं। ताजा मामला गोरखपुर का है, जहां शहर के जानेमाने टेक्सटाइल कारोबारी और चैंबर ऑफ टेक्सटाइल्स गोरखपुर के अध्यक्ष राजेश नेभानी को फेसबुक पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। प्रोफाइल उत्तर प्रदेश के संभल जिले के पुलिस अधीक्षक और गोरखपुर में रह चुके आईपीएस अधिकारी कृष्ण कुमार बिश्नोई के नाम से थी।
राजेश नेभानी ने पहले तो रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें याद आया कि वह असली फेसबुक प्रोफाइल से तो करीब दो साल पहले ही जुड़े हुए हैं। यहीं से उन्हें शक हुआ और उन्होंने बिना देर किए सीधे एसपी संभल कृष्ण कुमार बिश्नोई को फोन कर पूरी जानकारी दी।
ठग की पहचान उजागर करने के लिए बातचीत जारी रखने की सलाह
एसपी ने उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी और साइबर ठग की पहचान उजागर करने के लिए बातचीत जारी रखने को कहा। इसके बाद ठग ने नया दांव चला। चैट के दौरान उसने बताया कि उसका एक आर्मी से रिटायर्ड मित्र “संतोष” गोरखपुर में है, जो अपना फर्नीचर बेहद सस्ते दामों में बेचकर जा रहा है। कुछ देर बाद कथित आर्मी अधिकारी का फोन भी आ गया। उसने फर्नीचर की तस्वीरें भेजीं और 85 हजार रुपये ऑनलाइन भेजने की मांग की।
उधर फर्जी आईपीएस अधिकारी लगातार चैट पर भरोसा दिलाता रहा कि भुगतान कर दीजिए, फर्नीचर सुरक्षित रहेगा और बाद में वह संभल मंगा लिया जाएगा। लेकिन राजेश नेभानी ने पहले ही ठगों की चाल समझ ली थी। उन्होंने जानबूझकर भुगतान टालना शुरू किया और आखिरकार को भी एहसास हो गया कि उनका शिकार इस बार फंसने वाला नहीं है।
लिखित शिकायत प्राप्त होने पर होगी कार्रवाई
हैरानी की बात यह रही कि व्यापारी ने घटना की जानकारी गोरखपुर के साइबर अधिकारियों को भी दी, लेकिन तत्काल कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आई। वहीं, जब नवभारत ने एसपी क्राइम से बात की तो उन्होंने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। साइबर थाने का कहना था कि इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
यह घटना सिर्फ एक व्यापारी के साथ हुई ठगी की कोशिश नहीं, बल्कि हर उपयोगकर्ता के लिए बड़ा सबक है। किसी भी अधिकारी, परिचित या मित्र की प्रोफाइल देखकर आंख मूंदकर भरोसा न करें। एक छोटीसी सतर्कता आपकी जीवनभर की कमाई बचा सकती है।



