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आर्मी अफसर बनकर हो रही है साइबर ठगी, जानिए ठगों का नया तरीका और बचाव के आसान उपाय..

आर्मी अफसर बनकर हो रही है साइबर ठगी, जानिए ठगों का नया तरीका और बचाव के आसान उपाय..

देशभर में साइबर ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। हाल के दिनों में ठग भारतीय सेना के अधिकारी या जवान बनकर लोगों का भरोसा जीत रहे हैं और फिर अलग-अलग बहानों से पैसे ठग रहे हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ छोटे व्यापारी, मकान मालिक, डॉक्टर, शिक्षक और ऑनलाइन सेवाएं देने वाले लोग भी इस तरह के फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं।

कैसे करते हैं ठगी?

साइबर ठग फोन कॉल, व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं और खुद को सेना का अधिकारी या जवान बताते हैं। भरोसा जीतने के लिए वे नकली पहचान पत्र, फर्जी दस्तावेज या यूनिफॉर्म में तस्वीरें भी भेज सकते हैं।

इसके बाद वे सामान खरीदने, किराए पर मकान लेने, किसी सेवा का भुगतान करने या बड़े ऑर्डर का झांसा देते हैं। कई मामलों में वे जल्दी भुगतान करने का दबाव बनाते हैं और QR कोड या पेमेंट रिक्वेस्ट भेज देते हैं।

UPI के जरिए कैसे होता है फ्रॉड?

ठग अक्सर कहते हैं कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI पिन दर्ज करना होगा। जबकि सच्चाई यह है कि UPI पिन केवल पैसे भेजने के लिए इस्तेमाल होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।

यदि आप किसी संदिग्ध पेमेंट रिक्वेस्ट पर UPI पिन दर्ज करते हैं, तो आपके खाते से पैसे कट सकते हैं।

कारोबारियों को कैसे बनाते हैं निशाना?

छोटे और मध्यम कारोबारियों को बड़ी खरीद का ऑर्डर देने का लालच दिया जाता है।

इसके बाद मर्चेंट रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी डिपॉजिट, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहा जाता है।

जैसे ही भुगतान हो जाता है, ठग संपर्क समाप्त कर देते हैं।

ऐसे करें अपनी सुरक्षा

कभी भी पैसे प्राप्त करने के लिए UPI पिन दर्ज न करें।

अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए QR कोड को स्कैन करने से बचें।

फोन, व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल पर भेजे गए पहचान पत्र को देखकर तुरंत भरोसा न करें।

किसी भी भुगतान से पहले व्यक्ति और संस्था की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।

यदि सामने वाला जल्दबाजी में भुगतान करने का दबाव बना रहा है, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।

ट्रांजेक्शन पूरा करने से पहले स्क्रीन पर लिखी जानकारी ध्यान से पढ़ें।

किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या फाइल को डाउनलोड न करें।

यदि ठगी हो जाए तो क्या करें?

घटना का पता चलते ही तुरंत अपने बैंक और संबंधित भुगतान ऐप के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें।

राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

यदि संदिग्ध कॉल, मैसेज या व्हाट्सऐप नंबर मिले, तो उसकी रिपोर्ट भी करें।

याद रखें

भारतीय सेना, सरकारी विभाग या कोई भी वैध संस्था किसी व्यक्ति से सामान खरीदने, भुगतान प्राप्त करने या ऑर्डर देने के नाम पर UPI पिन, ओटीपी, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी नहीं मांगती। यदि कोई ऐसा करता है, तो सतर्क रहें और उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना कोई भी भुगतान न करें।

निष्कर्ष

साइबर ठग अब लोगों का भरोसा जीतने के लिए नई-नई पहचान अपनाते हैं। ऐसे में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी अनजान व्यक्ति पर केवल उसकी पहचान या वर्दी देखकर भरोसा न करें। भुगतान करने से पहले हर जानकारी की अच्छी तरह जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आप किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत संबंधित बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और स्थानीय साइबर अपराध प्राधिकरण से संपर्क करें।

contact.satyareport@gmail.com

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