
भोपाल, मध्य प्रदेश: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य दोनों भगवानों के बीच किसी तरह का भेद पैदा करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार भावुकता और जोश में उनके मुंह से ऐसी बातें निकल जाती हैं, जिनका गलत अर्थ निकाला जा सकता है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं और ठाकुर जी के प्रति उनकी गहरी आस्था है। उन्होंने हाथ जोड़कर उन लोगों से क्षमा मांगी, जिन्हें उनकी बातों से दुख पहुंचा है। उनका कहना था कि उनकी टिप्पणी को पूरे संदर्भ में समझने के बजाय उसका एक हिस्सा देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी बताया जाने लगा।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर क्या सफाई दी?
बाबा बागेश्वर ने बताया कि उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच अंतर बताने के उद्देश्य से कोई बात नहीं कही थी। वह एक संत द्वारा रचित प्रचलित पद की व्याख्या कर रहे थे। इस पद में बांसुरी बजाने और धनुष उठाने का उल्लेख करते हुए दोनों भगवानों के स्वभाव को भावनात्मक और काव्यात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि ब्रज की परंपरा में कई बार संत और भक्त प्रेम के भाव में अपने आराध्य से उलाहना करते हैं। इसी तरह गोपियां भगवान श्रीकृष्ण से और सखियां भगवान श्रीराम से प्रेमपूर्ण अंदाज में शिकायत करती हैं। उनकी टिप्पणी भी इसी भाव से जुड़ी थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनकी पूरी बात को समझे बिना कुछ लोगों ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का विरोधी घोषित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण उनके आराध्य हैं और उनके नाम से ही उनका जीवन जुड़ा हुआ है।
कृष्ण जन्मभूमि को लेकर भी कही अपनी बात
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी सफाई में कृष्ण जन्मभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में उनके बारे में यह कहना कि वह भगवान श्रीकृष्ण के विरोधी हैं, उनकी भावना को गलत तरीके से समझना है।
उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों एक ही हैं और उनके बीच कोई अंतर नहीं है। उनका उद्देश्य समाज को बांटना या भगवानों के बीच भेद पैदा करना नहीं था। इसके बावजूद अगर उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह विनम्रता के साथ माफी मांगते हैं।
दो बार मांगी माफी, कथा के दौरान भी किया जिक्र
रिपोर्ट के मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने पहले एक बयान जारी कर अपनी टिप्पणी पर खेद जताया। इसके बाद कथा के दौरान व्यासपीठ से भी उन्होंने दोबारा माफी मांगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी बयान का आधा हिस्सा सुनकर उसका गलत अर्थ न निकालें। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी के विरोध में बोलना नहीं होता, बल्कि वह अपने भाव और विचार व्यक्त करते हैं।
बोले- जोश में आकर कई बार ऐसा कर जाते हैं
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि भावावेश में कई बार उनसे ऐसी बातें निकल जाती हैं, जिन्हें नहीं कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की धार्मिक आस्था के खिलाफ बोलने का नहीं रहता।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल इतना कहने पर कि ठाकुर जी चंचल हैं और भगवान राम सीधे स्वभाव के हैं, कुछ लोगों ने उन्हें कृष्ण विरोधी बताना शुरू कर दिया। उन्होंने आलोचना करने वालों से अपील की कि उनकी बातों को संदर्भ के साथ समझें।
बाबा बागेश्वर ने राष्ट्र प्रेम और राम प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि वह लोगों को अपनी जड़ों और देश से जुड़े रहने की बात करते हैं। उनका कहना था कि कोई व्यक्ति दुनिया के किसी भी हिस्से में रहे, लेकिन अपनी भारतीय पहचान और देश के प्रति प्रेम बनाए रखे।
सोशल मीडिया पर विरोध को लेकर भी बोले बाबा बागेश्वर
अपनी सफाई के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए उनका विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक नया चलन बन गया है, जिसमें कुछ लोग चर्चा में आने के लिए बाबा बागेश्वर के बयान को लेकर विवाद खड़ा कर देते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी टिप्पणी किसी संत के लिखे पद की व्याख्या के संदर्भ में थी और इसे भगवान श्रीकृष्ण के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दुर्गा पूजा के दौरान भी बयान को लेकर हुआ था विवाद
गौरतलब है कि इससे पहले दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज भोजन को लेकर दिए गए धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भी विवाद हुआ था। उन्होंने कहा था कि दुर्गा और मुर्गा साथ-साथ नहीं चल सकता। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
उस विवाद पर भी धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी बात बंगाल को लेकर नहीं, बल्कि बलि प्रथा के संदर्भ में थी।
फिलहाल भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर माफी मांगने के बाद धीरेंद्र शास्त्री का यह स्पष्टीकरण चर्चा में है।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। विवाद से जुड़े विचारों और प्रतिक्रियाओं को संबंधित संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।



