CrimeIndia

गोलीकांड में धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग जेल भेजे गए: ; किसान पर गोली चलाने के मामले में न्यायिक हिरासत

गोलीकांड में धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग जेल भेजे गए: ; किसान पर गोली चलाने के मामले में न्यायिक हिरासत

मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग को किसान पर कथित फायरिंग के मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया है। राजनगर थाना पुलिस ने बुधवार को उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।

जमीन विवाद के दौरान चली थी गोली

पुलिस के अनुसार, राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ा में जमीन कब्जे को लेकर हुए विवाद के दौरान एक किसान को गोली लगने से गंभीर चोटें आईं। इस मामले में शालिग्राम गर्ग समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

घायल किसान का ग्वालियर के अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

दो आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी

पुलिस ने इस मामले में शालिग्राम गर्ग और अंकित मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले के दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

जेल ले जाने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत से जिला जेल ले जाने की प्रक्रिया भी चर्चा में है। कुछ स्थानीय पत्रकारों ने दावा किया है कि आरोपियों को सामान्य पुलिस वाहन की बजाय एक निजी लग्जरी वाहन से जेल ले जाया गया। यह भी कहा गया कि अदालत से जेल की दूरी कम होने के बावजूद उन्हें वहां पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।

हालांकि, इन दावों की पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहले ही बना चुके हैं दूरी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पिछले तीन वर्षों से उनका अपने छोटे भाई शालिग्राम गर्ग से कोई संबंध नहीं है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

नोट: मामले में लगाए गए आरोप पुलिस की प्राथमिकी और प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। आरोपियों का दोष या निर्दोष होना न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply