
नई दिल्ली: भारत में मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी बनवाना मतदान के अधिकार से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया है। लेकिन कई बार नौकरी, पढ़ाई या परिवार के साथ दूसरी जगह जाने के बाद एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज रह जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कैसे होता है और क्या दो जगह वोटर कार्ड होना गैरकानूनी है?
नियमों के मुताबिक, एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज नहीं होना चाहिए। दो जगह नाम दर्ज होने और जानबूझकर दो बार मतदान करने के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों स्थितियों में मतदाता को नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
आखिर एक व्यक्ति के दो वोटर कार्ड कैसे बन जाते हैं?
इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। सबसे आम कारण है घर या शहर बदलने के बाद पुरानी मतदाता सूची से नाम नहीं हटना। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति गांव से शहर में नौकरी करने चला जाता है और नए पते पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करा लेता है, लेकिन उसका नाम गांव की पुरानी सूची में भी बना रहता है।
इसके अलावा, आवेदन भरते समय गलत फॉर्म का इस्तेमाल करने या पुराने रिकॉर्ड की जानकारी सही तरीके से दर्ज नहीं होने पर भी दोहरी प्रविष्टि की स्थिति बन सकती है।
कभी-कभी नाम, पिता के नाम, जन्मतिथि या पते में अंतर होने से भी रिकॉर्ड का मिलान करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, हर मामले में यही कारण हो, यह जरूरी नहीं है। संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही वास्तविक वजह पता चलती है।
पता बदलने पर कौन-सा फॉर्म भरना चाहिए?
चुनाव आयोग की प्रक्रिया में नए मतदाता के पंजीकरण और पहले से पंजीकृत मतदाता के पते में बदलाव के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित हैं।
- फॉर्म 6: पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए।
- फॉर्म 8: पहले से पंजीकृत मतदाता के निवास स्थान में बदलाव, मतदाता सूची में सुधार या अन्य निर्धारित संशोधनों के लिए।
- फॉर्म 7: मतदाता सूची में नाम हटाने या नाम दर्ज होने पर आपत्ति जैसे निर्धारित उद्देश्यों के लिए।
इसलिए यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता है और उसका पता बदल गया है, तो उसे अपनी स्थिति के अनुसार सही प्रक्रिया अपनानी चाहिए। बिना जांच किए नए पंजीकरण के लिए आवेदन करने से दोहरी प्रविष्टि की समस्या पैदा हो सकती है।
क्या दो जगह वोटर आईडी रखना गैरकानूनी है?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 17 के तहत कोई व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता। इसी अधिनियम की धारा 18 एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार पंजीकरण पर रोक लगाती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि दो वोटर कार्ड होना और दो जगह मतदाता सूची में नाम दर्ज होना बिल्कुल एक जैसी बात नहीं है। किसी पुराने कार्ड के साथ नया कार्ड जारी होने की स्थिति में रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। कानूनी सवाल मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा है कि व्यक्ति का नाम कितनी मतदाता सूचियों में दर्ज है।
दो जगह नाम होने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
यदि किसी व्यक्ति का नाम नियमों के विरुद्ध एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज पाया जाता है, तो संबंधित प्रविष्टियों की जांच और नियमानुसार सुधार या नाम हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता सूची से संबंधित आवेदन या घोषणा में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर सजा का प्रावधान है। वहीं, दोहरी प्रविष्टि के मामले में लागू कार्रवाई तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है।
दो जगह नाम दर्ज होने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि व्यक्ति ने धोखाधड़ी की है। लेकिन जानबूझकर गलत घोषणा करना या एक से अधिक जगह मतदान करना गंभीर कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मामले की वास्तविक स्थिति देखना जरूरी है।
डुप्लीकेट नाम हटवाने के लिए क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसका नाम दो जगह मतदाता सूची में दर्ज है, तो उसे संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल के माध्यम से सुधार की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
इसके लिए ये कदम उठाए जा सकते हैं:
- दोनों स्थानों की मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांचें।
- तय करें कि सामान्य निवास के आधार पर किस निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकरण रखना उचित है।
- संबंधित बदलाव या नाम हटाने के लिए सही फॉर्म और प्रक्रिया अपनाएं।
- आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति की जांच करें और जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क करें।
फॉर्म 7 हर स्थिति में अपने आप लागू नहीं होता, इसलिए आवेदन करने से पहले यह देखना चाहिए कि मामले में नाम हटाने की जरूरत है या निवास स्थान बदलने की प्रक्रिया अपनानी है।
मतदाता सूची की जांच क्यों जरूरी है?
मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। घर बदलने के बाद पुराने पंजीकरण की जांच करना, सही फॉर्म भरना और विवरण में गलती होने पर उसे समय रहते ठीक करवाना दोहरी प्रविष्टियों से बचने में मदद करता है।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख मतदाता पंजीकरण से जुड़े सामान्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी देता है। किसी विशेष मामले में सही प्रक्रिया जानने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक निर्देशों और संबंधित निर्वाचन अधिकारी से पुष्टि करें।



