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​IAS छोड़कर सियासत में उतरीं दिव्या मित्तल, बोलीं- किसी झंडे के नीचे नहीं, जनता के साथ करूंगी राजनीति

​IAS छोड़कर सियासत में उतरीं दिव्या मित्तल, बोलीं- किसी झंडे के नीचे नहीं, जनता के साथ करूंगी राजनीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को करीब नौ मिनट का वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी, बल्कि लोगों के साथ मिलकर राजनीति करेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी यहीं से करने की बात कही।

दिव्या मित्तल ने कहा कि IAS से इस्तीफा देने के बाद लोगों के मन में यह सवाल था कि आगे क्या करेंगी। उन्होंने खुद इसका जवाब देते हुए कहा “राजनीति।” उनके मुताबिक, वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंचती या पहुंचने के बाद सुनी नहीं जाती।

‘मुझे उन स्कूलों का हिसाब चाहिए’

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए लहुरिया दह की एक घटना साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में निरीक्षण के दौरान एक महिला उनके पास आई और उसने अपने घर के लिए पानी मांगने के बजाय बच्चों की पढ़ाई के लिए आगे की कक्षाओं का स्कूल मांगा।

दिव्या मित्तल के अनुसार, स्कूल को मंजूरी मिलने के बावजूद तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और स्वीकृति मौजूद थी तो काम क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि समस्या केवल इरादे की थी और इसी तरह के मामलों का वह “हिसाब” चाहती हैं।

‘न्याय हक है, कृपा नहीं’

पूर्व IAS ने एक भूमिहीन व्यक्ति का मामला भी सुनाया। उनके मुताबिक, व्यक्ति को सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद जमीन पर कब्जा नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि जांच में संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और कार्रवाई भी हुई, लेकिन कब्जा दिलाने के मामले में कथित तौर पर “ऊपर से मना” होने की बात कही गई।

दिव्या मित्तल ने सवाल उठाया कि आखिर यह “ऊपर” कौन है। उन्होंने कहा कि संविधान में सबसे ऊपर जनता है और न्याय किसी की कृपा नहीं बल्कि लोगों का अधिकार है।

सड़कों और हादसों का भी उठाया मुद्दा

दिव्या मित्तल ने गांवों की सड़कों, पुलों और बरसात में संपर्क टूटने की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई जगह सड़कें नहीं हैं, नदियों पर पुल नहीं हैं और कई गांव बारिश में टापू बन जाते हैं।

उन्होंने खराब सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों का जिक्र करते हुए प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, अधिकारियों को समस्याओं और फाइलों की जानकारी होती है, लेकिन चिंता की कमी के कारण हादसे होते हैं।

पेपर लीक से AI तक, युवाओं के भविष्य पर चिंता

पूर्व IAS ने परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं और पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी जिक्र किया। दो बेटियों की मां होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भविष्य को लेकर चिंता है और राजनीति में इस तरह के मुद्दों पर सोच और चर्चा की जरूरत है।

https://twitter.com/divyamittal_IAS/status/2104769086446280938?s=20

‘राजनेता बदलना नहीं, राजनीति बदलना है’

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं बल्कि राजनीति के तौरतरीकों में बदलाव लाना है। उन्होंने “इरादे, न्याय, फिक्र और सोच” की राजनीति की बात कही।

उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं बल्कि लोगों के साथ राजनीति करेंगी। उनके अनुसार, पिछले दशकों में राजनीतिक दलों के साथ जुड़कर जनता की समस्याओं का पूरा समाधान नहीं हो सका, इसलिए वह अलग तरीके से शुरुआत करना चाहती हैं। यह उनके वीडियो में व्यक्त उनका राजनीतिक दृष्टिकोण है।

‘डरूंगी नहीं, सवाल पूछूंगी’

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में सोशल मीडिया पर उनके बारे में फैली एक कथित अफवाह का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता ने उनके एक बड़े नेता से मिलने की बात लिखी, जबकि उनके मुताबिक ऐसी कोई मुलाकात हुई ही नहीं थी।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी से डरना नहीं बल्कि सवाल पूछना है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आम लोगों की भागीदारी बढ़नी चाहिए।

पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण पर क्या बोलीं?

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति के लिए बड़े पैमाने पर पैसा, बाहुबल या जातीय समीकरण नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनावों में खर्च होने वाला पैसा आखिर कहां से आता है।

उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा पैसा नहीं चाहिए और वह जनता से मिलने वाली शक्ति के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं। जाति और धर्म के आधार पर राजनीतिक समीकरण बनाने के बजाय उन्होंने सभी के लिए समान न्याय की बात कही।

‘उत्तर प्रदेश ही मेरी कर्मभूमि’

दिव्या मित्तल ने कहा कि अधिकारी के रूप में उत्तर प्रदेश में काम करने के दौरान लोगों ने उन्हें परिवार का हिस्सा माना। उन्होंने कहा कि यूपी की मिट्टी ने उन्हें यह समझने में मदद की कि वह कौन हैं और किसके लिए काम करना चाहती हैं।

इसी वजह से उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू करने का ऐलान किया। उनकी राजनीति में एंट्री को लेकर पिछले कुछ दिनों से अटकलें चल रही थीं। उन्होंने 29 सितंबर को अपने अगले कदम का ऐलान करने की बात पहले ही कही थी।

‘मुझ पर भरोसा मत करिए, खुद पर करिए’

वीडियो के अंत में दिव्या मित्तल ने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील, छात्र और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावकों से जुड़ने की अपील की।

उन्होंने कहा कि नई राजनीति कोई एक व्यक्ति नहीं बना सकता और इसमें आम लोगों की भागीदारी जरूरी होगी। उन्होंने लोगों से अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संपर्क करने की अपील की और कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जहां किसी आम व्यक्ति को सरकारी दफ्तर में अपना काम कराने के लिए सिफारिश या किसी फोन की जरूरत न पड़े।

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