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चेहरे के काले धब्बों को नजरअंदाज न करें, पिग्मेंटेशन के हो सकते हैं संकेत

चेहरे पर छोटेछोटे काले या भूरे धब्बे दिखना आम बात लग सकती है, लेकिन कई बार ये पिग्मेंटेशन का संकेत हो सकते हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ टैनिंग या उम्र बढ़ने का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके पीछे धूप, हार्मोनल बदलाव, मुंहासों के निशान या अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि पिग्मेंटेशन क्या है, इसे कैसे पहचाना जाए और यह समस्या क्यों होती है।

चेहरे के काले धब्बों को नजरअंदाज न करें, पिग्मेंटेशन के हो सकते हैं संकेत
चेहरे के काले धब्बों को नजरअंदाज न करें, पिग्मेंटेशन के हो सकते हैं संकेत

पोषण विशेषज्ञ पूजा मखीजा ने इंस्टाग्राम पोस्ट में पांच कारण बताए हैं जिसकी वजह से लोगों को पिगमेंटेशन की समस्या होती है। उनके मुताबिक हार्मोनल असंतुलन, डिहाइड्रेशन, शरीर को पर्याप्त प्रोटीन न मिल पाने, नींद की कमी और पोषक तत्वों की सही मात्रा न मिलने पर पिगेंटेशन हो सकती है।

सबसे पहले जानें क्या होती है पिग्मेंटेशन?

स्किन का कलर मेलानिन नाम के पिगमेंट से तय होता है। यह स्किन की सेल्स से बनाया जाता है। सूरज की पराबैंगनी किरणों से कुछ हद तक यह सेफ्ट भी करता है। जब स्किन के किसी हिस्से में मेलानिन सामान्य से अधिक बनने लगता है, तो वहां त्वचा का रंग गहरा दिखाई देने लगता है।

अब जानते हैं पिग्मेंटेशन को कैसे पहचानें?

चेहरे पर भूरे, काले या गहरे रंग के धब्बे दिखाई देना।
त्वचा का रंग कुछ जगहों पर असमान लगना।
गालों, माथे, नाक या ऊपरी होंठ के आसपास पैच बन जाना।
मुंहासे ठीक होने के बाद निशान लंबे समय तक बने रहना।
धूप में जाने के बाद धब्बों का और गहरा होना।
त्वचा पर ऐसे निशान जो सामान्य स्किन के मुकाबले अधिक गहरे दिखें।

समझें टैनिंग और पिग्मेंटेशन में अंतर

कई लोग टैनिंग और पिग्मेंटेशन को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। टैनिंग आमतौर पर धूप में ज्यादा समय बिताने से होती है और अक्सर पूरे चेहरे या शरीर के खुले हिस्से पर समान रूप से दिखाई देती है। पिग्मेंटेशन में त्वचा के कुछ खास हिस्सों पर गहरे धब्बे या पैच बनते हैं, जो लंबे समय तक बने रह सकते हैं।

अब समझिए पिग्मेंटेशन क्यों होती है?

धूप के संपर्क में ज्यादा रहना

सूरज की UV किरणें मेलानिन का प्रोडक्शन को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक बिना सनस्क्रीन के धूप में रहने से डार्क स्पॉट्स बनने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था, कुछ दवाओं को खाने या हार्मोनल असंतुलन के कारण चेहरे पर भूरे पैच बन सकते हैं। इसे कई मामलों में मेलास्मा कहा जाता है।

मुंहासों के निशान

एक्ने या पिंपल्स ठीक होने के बाद त्वचा पर गहरे निशान रह सकते हैं। इसे पोस्टइन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है।

बढ़ती उम्र

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पर सन स्पॉट्स या एज स्पॉट्स दिखाई देने लगते हैं, जो लगातार धूप के संपर्क की वजह से परमानेंट हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यदि आपकी त्वचा पर लगातार गहरे धब्बे बने हुए हैं या उनमें कोई असामान्य बदलाव दिखाई देता है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

contact.satyareport@gmail.com

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