
शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कभी त्वचा का रंग बदलने लगता है, तो कभी नाखून कमजोर होकर टूटने लगते हैं। हाथों और नाखूनों में दिखने वाले कुछ बदलाव आयरन या विटामिन की कमी, शरीर में पानी की कमी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि, केवल हथेली या नाखून देखकर किसी पोषक तत्व की कमी या बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इन बदलावों के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। ऐसे में लक्षण लगातार बने रहने पर सही जांच कराना जरूरी है।
1. उंगलियों के जोड़ों पर कालापन
उंगलियों के जोड़ों की त्वचा अगर सामान्य से ज्यादा गहरी दिखाई देने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में त्वचा का असामान्य कालापन विटामिन बी12 की कमी से जुड़ा हो सकता है, लेकिन यह इसका निश्चित संकेत नहीं है।
त्वचा के जोड़ों पर कालापन इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोन संबंधी बदलावों या त्वचा की अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकता है।
क्या करें: अगर कालापन नया है, बढ़ रहा है या इसके साथ थकान, कमजोरी और हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसे लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर विटामिन बी12 और ब्लड शुगर की जांच कराई जा सकती है।
2. नाखूनों का सूखा और बार-बार टूटना
नाखूनों का कमजोर होना, बीच से टूटना या आसानी से चटक जाना कई कारणों से हो सकता है। बार-बार पानी और डिटर्जेंट के संपर्क में आना, नाखूनों पर केमिकल का इस्तेमाल, थायरॉइड की समस्या और आयरन की कमी इसके संभावित कारण हैं।
आयरन की कमी होने पर कुछ लोगों के नाखून पतले, कमजोर या चम्मच की तरह अंदर की ओर मुड़े हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, केवल नाखून टूटने से आयरन की कमी साबित नहीं होती।
क्या करें: आहार में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां और आयरन से भरपूर दूसरे खाद्य पदार्थ शामिल करें। यदि नाखूनों की समस्या लगातार बनी रहे या साथ में थकान और कमजोरी भी हो, तो डॉक्टर की सलाह पर हीमोग्लोबिन और आयरन से जुड़ी जांच कराएं। बिना जांच के आयरन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
3. हाथों की त्वचा का ढीलापन
हाथ के पीछे की त्वचा को हल्के से खींचने पर उसका तुरंत पहले जैसी स्थिति में न लौटना कभी-कभी शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। लेकिन इस तरीके से अकेले डिहाइड्रेशन की पुष्टि नहीं की जा सकती।
उम्र बढ़ने, त्वचा की प्राकृतिक बनावट और कुछ अन्य स्थितियों के कारण भी त्वचा का लचीलापन कम हो सकता है।
क्या करें: दिनभर नियमित रूप से पानी पिएं और गर्मी, व्यायाम या अधिक पसीना आने पर तरल पदार्थों की जरूरत का ध्यान रखें। पेशाब का रंग बहुत गहरा होना, मुंह सूखना, चक्कर आना और पेशाब कम होना भी पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं।
यदि बहुत ज्यादा कमजोरी, भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
4. उंगलियों के जोड़ों में सूजन और दर्द
उंगलियों के छोटे जोड़ों में दर्द, सूजन और सुबह उठने पर अकड़न होना रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी सूजन संबंधी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसके अलावा जोड़ों की दूसरी समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
ऐसे लक्षणों को केवल कैल्शियम या विटामिन की कमी मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण होता है।
क्या करें: अगर उंगलियों के जोड़ों में बार-बार सूजन आती है, दोनों हाथों में परेशानी होती है या सुबह की अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराएं। यदि जोड़ अचानक बहुत लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाए तथा बुखार भी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
5. नाखूनों का पीला पड़ना
नाखूनों का रंग पीला होना फंगल संक्रमण की वजह से हो सकता है। इसके अलावा नाखूनों पर नेल पॉलिश का लगातार इस्तेमाल, धूम्रपान और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी रंग में बदलाव ला सकती हैं।
अगर नाखून पीले होने के साथ मोटे हो रहे हैं, टूट रहे हैं या उनके नीचे मलबे जैसा पदार्थ जमा हो रहा है, तो फंगल संक्रमण की आशंका हो सकती है। हालांकि, केवल रंग देखकर संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।
क्या करें: नाखूनों को साफ और सूखा रखें, व्यक्तिगत नेल केयर उपकरण साझा न करें और लगातार बदलाव होने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। बिना सही पहचान के एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल न करें।
हाथों और नाखूनों की सेहत के लिए क्या जरूरी है?
- संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन, आयरन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्व हों।
- पर्याप्त पानी पिएं और शरीर में पानी की कमी के संकेतों पर ध्यान दें।
- सफाई के उत्पादों का इस्तेमाल करते समय जरूरत के अनुसार दस्ताने पहनें।
- नाखूनों के रंग, आकार या बनावट में लगातार बदलाव होने पर जांच कराएं।
- बिना जांच के विटामिन, आयरन या कैल्शियम की गोलियां लेना शुरू न करें।
डिस्क्लेमर: हथेलियों और नाखूनों में होने वाले बदलाव स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं, लेकिन ये किसी बीमारी या पोषण की कमी का पक्का प्रमाण नहीं हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार जांच कराना जरूरी है।



