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हेल्दी समझकर न करें ये गलती! ये 5 फूड्स बन सकते हैं दिल की बीमारी की वजह..

हेल्दी समझकर न करें ये गलती! ये 5 फूड्स बन सकते हैं दिल की बीमारी की वजह..

क्या आप भी अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ फूड्स को ‘हेल्थ फ्रेंडली’ या सेहतमंद मानकर शामिल कर रहे हैं तो तुरंत अपनी आदत बदल लें। आधुनिक लाइफस्टाइल और आकर्षक पैकेजिंग के दौर में जिन चीजों को हम दिल के लिए फायदेमंद समझते हैं, उनमें से कई चीजें असल में हमारी कार्डियोवैस्कुलर सेहत यानी हार्ट हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही होती हैं। बिना डॉक्टरी सलाह और सही वैज्ञानिक समझ के इन फूड्स का लगातार सेवन नसों के ब्लॉक होने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या सीधे तौर पर दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक Dr. Bimal Chhajer के अनुसार, दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल पौष्टिक चीजें खाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना भी जरूरी है जो हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार लोग कुछ फूड्स को हेल्दी समझकर नियमित रूप से खाते हैं, जबकि वे धीरे-धीरे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट से कम या पूरी तरह बाहर करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन फूड्स से परहेज करके आप अपने दिल को लंबे समय तक हेल्दी रख सकते हैं।

अखरोट का सेवन सीमित करें

डॉ. बिमल झाजर के अनुसार, अखरोट में फैट की मात्रा काफी अधिक होती है। हालांकि इसे आमतौर पर पौष्टिक माना जाता है, लेकिन दिल के रोगियों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। किसी भी ड्राई फ्रूट का अत्यधिक सेवन कैलोरी और फैट बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करना बेहतर है।

American Journal of Clinical Nutrition और Circulation की रिसर्च के अनुसार, जब कोई हार्ट का मरीज मुट्ठी भर-भर कर मेवे खाता है, तो शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी लिवर में जाकर ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) में बदल जाती है। ट्राइग्लिसराइड्स खून में मौजूद एक प्रकार का फैट है। रिसर्च साबित करती है कि खून में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर धमनियों की दीवारों को मोटा और सख्त बनाता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहते हैं। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बनती है।

बादाम ज्यादा न खाएं

बादाम प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, लेकिन इसमें फैट और कैलोरी भी मौजूद होती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि हृदय रोगियों को बादाम का सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। संतुलित मात्रा में सेवन करने से पोषण मिलता है, जबकि अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।

मछली और चिकन का सेवन सोच-समझकर करें

दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए मछली और चिकन का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। खासकर प्रोसेस्ड या ज्यादा तेल-मसाले में बने नॉनवेज फूड्स हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। हेल्दी कुकिंग और नियंत्रित मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

The Harvard T.H. Chan School of Public Health की एक व्यापक रिसर्च के अनुसार, जब चिकन या मछली को भारतीय तरीके से तेल, बटर या मसालों में पकाया जाता है, तो हाई टेम्परेचर पर इनमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल (Oxidized LDL) में बदल जाता है। नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल के मुकाबले ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा चिपचिपा होता है। यह धमनियों की अंदरूनी परत (Endothelium) को डैमेज करता है और वहां जाकर चिपक जाता है, जिससे नसों में ब्लॉकेज (Plaque) बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।

अलसी के बीज अधिक मात्रा में न लें

अलसी के बीज फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। एक्सपर्ट के मुताबिक, हृदय रोगियों को अलसी का सेवन अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

घी का सेवन कंट्रोल रखें

घी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है, लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट मौजूद होता है। अगर किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या है, तो उसे घी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। संतुलित आहार और कम फैट वाले विकल्प अपनाकर दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह विशेषज्ञ के विचारों पर आधारित है। किसी भी खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट से पूरी तरह हटाने या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी भी सलाह को व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प न मानें।

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