
अलास्का: बर्फ से ढके पहाड़ों में अचानक आए हिमस्खलन ने एक परिवार की जिंदगी को चिंता में डाल दिया। हादसे में दो पर्वतारोही गंभीर रूप से घायल हो गए और चार साल की उनकी प्यारी डॉगी लूलू लापता हो गई। मालिक अस्पताल में जिंदगी की मुश्किल घड़ी से गुजर रहा था, जबकि लूलू बर्फीले पहाड़ों में अकेली फंसी थी। करीब 50 घंटे तक उसकी तलाश चलती रही। आखिरकार Apple AirTag से मिले संकेतों और दो पायलटों की मदद से उसे जिंदा खोज निकाला गया। अब लूलू अपने घर लौट चुकी है और धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है।
चुगाच स्टेट पार्क में हुआ था खतरनाक हिमस्खलन
यह घटना 10 अक्टूबर को अलास्का के चुगाच स्टेट पार्क में हुई। लूलू चार साल की पूडल और हस्की नस्लों के मिश्रण वाली डॉगी है। वह दो अनुभवी पर्वतारोहियों के साथ पहाड़ों पर गई थी, तभी अचानक हिमस्खलन आ गया। बर्फ का तेज बहाव दोनों पर्वतारोहियों को पहाड़ी की एक रिज से करीब 500 फीट नीचे ले गया।
दोनों किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे, लेकिन उन्हें गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एक पर्वतारोही ब्रायन के जबड़े में फ्रैक्चर हुआ और हाथ में भी गंभीर चोट आई। वहीं, दूसरे पर्वतारोही की तीन पसलियां टूट गईं और रीढ़ की एक हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। हादसे के बाद लूलू का कोई पता नहीं चल रहा था, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती गई।
विदेश में थी मालिक की गर्लफ्रेंड, फिर शुरू की तलाश
Scripps News और People की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रायन की गर्लफ्रेंड लॉरेन पैडावर उस समय विदेश में अपने पिता का 80वां जन्मदिन मनाने गई थीं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने लूलू को ढूंढने के लिए हर संभव कोशिश शुरू कर दी।
लॉरेन ने स्थानीय बचाव संगठनों, पहाड़ों पर घूमने वाले समूहों और कई अन्य लोगों से संपर्क किया। लूलू की तलाश में 20 से अधिक स्वयंसेवक जुटे। खोज अभियान में गंध के जरिए जानवरों को ढूंढने में प्रशिक्षित एक कुत्ते की भी मदद ली गई।
Apple AirTag से मिला संकेत, लेकिन आसान नहीं थी राह
लूलू के गले में Apple AirTag लगा हुआ था। लॉरेन को उम्मीद थी कि इसकी मदद से डॉगी की लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, शुरुआत में डिवाइस से मिली लोकेशन वास्तविक जगह से करीब आधा मील दूर थी।
लॉरेन के मुताबिक, सामान्य जगह पर आधा मील की दूरी ज्यादा नहीं लगती, लेकिन चुगाच के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में यह अंतर बहुत मायने रखता है। इतनी दूरी का मतलब दूसरी पहाड़ी या बिल्कुल अलग रास्ता हो सकता था। खराब मौसम और दुर्गम इलाकों ने भी तलाश को मुश्किल बना दिया।
दो पायलटों ने हवाई रास्ते से शुरू की खोज
लूलू को ढूंढने के लिए पायलट अमांडा बार्कर और डेव बेकेट ने हवाई रास्ते से तलाश शुरू की। इस दौरान उन्हें Apple AirTag से एक और संकेत मिला। दूसरी तरफ, लॉरेन सैटेलाइट तस्वीरों और नक्शों की मदद से संभावित स्थानों का पता लगाने की कोशिश कर रही थीं।
काफी मशक्कत के बाद करीब 50 घंटे की तलाश रंग लाई। पायलटों को लूलू पहाड़ की ढलान पर जिंदा मिल गई। उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लूलू के मिलने की खबर सुनकर लॉरेन भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उसकी तस्वीर देखी, तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्हें कुछ पल के लिए यकीन ही नहीं हुआ कि लूलू सुरक्षित मिल गई है।
चोट लगी, लेकिन घर लौटकर तेजी से ठीक हो रही है लूलू
रिपोर्ट के मुताबिक, लूलू के पैर की एक उंगली और एक कैनाइन दांत में चोट आई थी, लेकिन उसकी बाकी हालत ठीक थी। घर लौटने के बाद अब वह आराम कर रही है और धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है।
लॉरेन का मानना है कि लूलू के घने बाल, बाहर रहने की आदत और पहाड़ी रास्तों पर चलने का अनुभव उसे कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में मददगार साबित हुए। उन्होंने इस बचाव अभियान के लिए दोनों पायलटों को असली हीरो बताया।
यह घटना दिखाती है कि मुश्किल हालात में खोज और बचाव दलों की मेहनत कितनी अहम होती है। हालांकि, Apple AirTag जैसे उपकरण लोकेशन का सुराग देने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे दुर्गम इलाकों में सटीक और लगातार ट्रैकिंग की गारंटी नहीं देते।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।



