Weather: भीषण गर्मी और तपिश के बीच आईएमडी ने आज दिल्ली और बिहार सहित देश के 24 राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है. वहीं कुछ राज्यों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग अनुसार दक्षिणपश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंच चुकी है.

आज दिल्ली में आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 3 से 4 दिनों के दौरान मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है.
यूपी में अभी राहत नहीं, लू का कहर जारी
मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 जून को भीषण लू और 28 जून तक लू चलने की संभावना है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 28 जून तक लू का असर बना रहेगा. इस दौरान प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी सहित कई जिलों में आंधी और बारिश के भी आसार हैं.
इन राज्यों में आंधीतूफान की चेतावनी
आईएमडी के अनुसार आज देश के कई राज्यों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरजचमक और बिजली गिरने की संभावना है. बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है.
मध्य भारत में भी बढ़ेगी बारिश
छत्तीसगढ़, बिहार, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र और ओडिशा में 27 से 30 जून के बीच कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं उत्तराखंड और हिमाचल में कल बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी तेज हवाओं के साथ आज बारिश का अनुमान है.
इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने 27 जून से 2 जुलाई तक पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अनुमान जताया है. अरुणाचल प्रदेश, असममेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.
इसके अलावा कोंकणगोवा, केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और कर्नाटक के कई हिस्सों में भी लगातार भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है.
पश्चिम बंगालसिक्किम में भारी बारिश
आईएमडी ने सबहिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 27 से 29 जून के बीच कहींकहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. इससे भूस्खलन, जलभराव और नदीनालों के उफान पर आने का खतरा बढ़ सकता है.



