
उत्तर प्रदेश के गोंडा की एक डॉक्टर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं। वजह उनका इलाज करने का अंदाज है। महिला मरीज जब अपनी परेशानी अवधी भाषा में बताती हैं तो डॉक्टर भी उसी अंदाज में उनसे बातचीत करती हैं। उनका यह देसी अंदाज मरीजों को इतना पसंद आता है कि अब डॉ. अनीता मिश्रा की चर्चा सोशल मीडिया पर भी होने लगी है।
खास बात यह है कि डॉ. अनीता की मातृ भाषा अवधी नहीं, बल्कि कन्नड़ है। उनका जन्म कर्नाटक के मंगलूर में हुआ, लेकिन शादी के बाद वह गोंडा आ गईं और यहां रहते-रहते पहले हिंदी और फिर अवधी भाषा सीख ली।
कर्नाटक में हुआ जन्म, गोंडा में बनाई पहचान
डॉ. अनीता मिश्रा मूल रूप से कर्नाटक के मंगलूर की रहने वाली हैं। उनके पिता व्यवसायी थे और परिवार में कन्नड़ भाषा बोली जाती थी। पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात गोंडा निवासी और उनसे दो साल सीनियर पूर्णोदय मिश्रा से हुई।
दोनों के बीच जान-पहचान आगे बढ़ी और साल 1997 में उन्होंने शादी कर ली। इसके बाद डॉ. अनीता का गोंडा आना हुआ और यहीं उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की नई शुरुआत की।
गोंडा आईं तो सामने आई भाषा की चुनौती
डॉ. अनीता ने साल 2000 में राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से एमएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद जब वह गोंडा आईं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भाषा की थी।
कन्नड़ और तुलु भाषाई माहौल से आने वाली अनीता के लिए स्थानीय लोगों की हिंदी समझना शुरुआत में आसान नहीं था। उन्होंने पहले हिंदी सीखी और धीरे-धीरे उसमें सहज हो गईं।
लेकिन डॉक्टर के सामने एक और चुनौती थी।
मरीजों की भाषा समझने के लिए सीखी अवधी
साल 2005 में डॉ. अनीता और उनके पति ने गोंडा में अपना निजी नर्सिंग होम शुरू किया। यहां बड़ी संख्या में महिला मरीज इलाज के लिए पहुंचने लगीं।
कई मरीज अपनी तकलीफ अवधी में ही बताती थीं। ऐसे में उनकी बात को ठीक तरह से समझने के लिए डॉ. अनीता ने अवधी सीखने का फैसला किया।
धीरे-धीरे उन्होंने स्थानीय भाषा को समझना और बोलना शुरू किया। कुछ ही समय में वह मरीजों से उनकी अपनी भाषा में बातचीत करने लगीं। इसका असर यह हुआ कि मरीज उनके सामने अपनी परेशानी ज्यादा सहजता से बताने लगीं।
‘पेटवा पिरात है, कनवा कुकुआत है…’
डॉ. अनीता बताती हैं कि मरीज जब अपनी परेशानी अवधी में बताती हैं तो उनकी भाषा उन्हें बेहद दिलचस्प और म्यूजिकल लगती है।
मरीज कभी कहती हैं कि ‘पेटवा पिरात है’, तो कोई ‘कनवा कुकुआत है’ या ‘गटईवा खासखसात है’ जैसी स्थानीय भाषा में अपनी समस्या बताती है।
डॉ. अनीता के मुताबिक, मरीजों की बात को उनकी ही भाषा में समझना और जवाब देना इलाज के दौरान एक अलग तरह का जुड़ाव पैदा करता है। शायद यही वजह है कि उनके मरीज उनसे काफी सहज महसूस करते हैं।
सोशल मीडिया पर भी रहती हैं एक्टिव
डॉक्टर होने के साथ-साथ डॉ. अनीता मिश्रा को कथक नृत्य में भी रुचि है। वह सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं और समय-समय पर अपनी रील्स शेयर करती हैं।
उनके बारे में यह भी बताया जाता है कि वह मिसेज इंडिया और मिसेज एशिया का खिताब हासिल कर चुकी हैं।
डॉ. अनीता और उनके पति का एक बेटा भी है, जो मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। कर्नाटक से निकलकर उत्तर प्रदेश के गोंडा में अपनी पहचान बनाने वाली डॉ. अनीता की कहानी इस बात की मिसाल है कि भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने का एक मजबूत जरिया भी बन सकती है।



