पटना
गंगा का जलस्तर पिछले सात दिनों से लगातार बढ़ रहा है। इसका असर अब घाटों से आगे बस्तियों और सड़कों के किनारे तक दिखाई देने लगा है।

कुर्जी के पीछे स्थित बिंद टोली में पानी प्रवेश कर गया है, जबकि एलसीटी घाट के पास पानी सड़क के किनारे तक पहुंच गया है।
पर्यटन घाट समेत लगभग सभी प्रमुख घाटों पर गंगा का पानी चढ़ गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।
शुक्रवार सुबह छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार, गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। यहां जलस्तर 49.17 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है।
एक दिन पहले, 20 अगस्त को जलस्तर 48.67 मीटर था। यानी 24 घंटे में जलस्तर 50 सेंटीमीटर बढ़ा है। 15 अगस्त को गांधी घाट पर जलस्तर 47.17 मीटर था। इस तरह छह दिनों में यहां करीब दो मीटर पानी बढ़ चुका है।
दीघा घाट पर खतरे के निशान से महज 25 सेंटीमीटर दूर
दीघा घाट पर भी स्थिति तेजी से गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार सुबह यहां जलस्तर 50.20 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.45 मीटर है। यानी गंगा का पानी लाल निशान से महज 25 सेंटीमीटर नीचे है।
20 अगस्त को यहां जलस्तर 49.56 मीटर था। इस तरह 24 घंटे में 64 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। 15 अगस्त को जलस्तर 47.86 मीटर था। इसकी तुलना में छह दिनों में यहां 2.34 मीटर पानी बढ़ चुका है।
मनेर में गंगा का जलस्तर 51.65 मीटर पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 52 मीटर है। यानी पानी लाल निशान से सिर्फ 35 सेंटीमीटर नीचे है।
वहीं, हाथीदह में जलस्तर 41.88 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है। यहां गंगा खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
जलस्तर बढ़ा तो निचले शहरी इलाकों पर बढ़ेगा दबाव
गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले शहरी इलाकों पर दबाव बढ़ सकता है
जलस्तर खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर पहुंचने पर शहरी क्षेत्र में भी खतरा बढ़ने की आशंका है। प्रशासन की ओर से शहरी सुरक्षा दीवार, निरीक्षित तटबंधों और अन्य सुरक्षा संरचनाओं को फिलहाल सुरक्षित बताया गया है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। हालांकि, नदी का बढ़ता दबाव निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।
छह दिन में गांधी घाट पर दो मीटर बढ़ा जलस्तर
स्थान15 अगस्त 20 अगस्त 21 अगस्तखतरे का निशान
गांधी घाट 47.17 मीटर 48.67 मीटर 49.17 मीटर 48.60 मीटर
दीघा घाट 47.86 मीटर 49.56 मीटर 50.20 मीटर 50.45 मीटर
हाथीदह40.44 मीटर 41.51 मीटर 41.88 मीटर 41.76 मीटर
मनेर 49.06 मीटर 50.81 मीटर 51.65 मीटर 52.00 मीटर
उफनाई गंगा देखने घाटों पर उमड़ रही भीड़
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज से मुंगेर तक गंगा के अधिकांश प्रमुख गेज स्थलों पर जलस्तर बढ़ रहा है।
प्रयागराज में 79.91 मीटर, वाराणसी में 68.70 मीटर और बक्सर में 58.88 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया है। ऊपरी क्षेत्रों में बढ़ते पानी का दबाव पटना में भी गंगा के जलस्तर पर पड़ रहा है।
उफनाई गंगा का चौड़ा पाट देखने के लिए जेपी गंगा पथ के दीघा घाट पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। शाम के समय अन्य घाटों पर भी लोगों की भीड़ जुट रही है।
वहीं, बढ़ते जलस्तर के कारण जेपी गंगा पथ के नदी किनारे वाले हिस्से में विकास और सुंदरीकरण कार्य प्रभावित हुए हैं। बांसघाट के आसपास वेस्ट टू वंडर पार्क समेत अन्य परियोजनाओं के काम भी रोकने पड़े हैं।
नाव से गंगा पार करने वालों को सावधानी बरतने की सलाह
एडीएम आपदा डीपी शाही ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए 219 नाव और नाविक तैयार हैं। गायघाट और बाढ़ के उमानाथ घाट पर एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैद हैं। किसी दुर्घटना की सूचना मिलने पर टीमें तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।
उन्होंने नाव से गंगा पार करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजीकृत नावों पर लाइफ जैकेट पहनकर ही यात्रा करें और ओवरलोड नावों पर कतई सवार न हों।
यथासंभव गंगा स्नान से बचें। यदि स्नान करना जरूरी हो तो चिह्नित घाटों पर सुरक्षित स्थल तक ही जाएं। तेज बहाव में तैरना भी सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के डूबने की स्थिति में उसे बचाने के लिए खुद पानी में कूदने के बजाय तत्काल बचाव दल या आपात सेवा 112 को सूचना दें।



