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सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव पर ED का शिकंजा, झांसी-लखनऊ समेत कई ठिकानों पर छापेमारी

Money Laundering Case: प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए झांसी और लखनऊ समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन और आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के तहत की गई। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं।

सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव पर ED का शिकंजा, झांसी-लखनऊ समेत कई ठिकानों पर छापेमारी
सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव पर ED का शिकंजा, झांसी-लखनऊ समेत कई ठिकानों पर छापेमारी

ED की टीम ने पूर्व विधायक, उनके परिवार के सदस्यों, उनसे जुड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों और अन्य संबंधित लोगों के आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और लाभकारी स्वामित्व से जुड़े सबूत जुटाना है।

विजिलेंस की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

अधिकारियों के अनुसार, ED की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले की FIR के आधार पर दर्ज एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट पर आधारित है। आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसके बाद धन शोधन निवारण अधिनियम , 2002 के तहत जांच शुरू की गई।

तलाशी में मिले अहम दस्तावेज

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के साथसाथ चल और अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त किए। इन दस्तावेजों के जरिए कथित अवैध कमाई के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है।

23 से अधिक मुकदमे, कई गंभीर आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दीप नारायण सिंह यादव ने , कंस्ट्रक्शन और अन्य कारोबारी कंपनियों एवं LLP के नेटवर्क के जरिए कथित रूप से अवैध धन का निवेश और लेनदेन किया। वह झांसी की गरौठा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, उनके खिलाफ पहले से 23 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, शुरुआती जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, हत्या का प्रयास, डकैती समेत लगभग 60 आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई है, जो भारतीय दंड संहिता, यूपी गैंगस्टर्स एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत दर्ज हैं।

ED ने कहा है कि धन शोधन निवारण अधिनियम , 2002 के तहत मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कथित अवैध कमाई को किनकिन संपत्तियों और कारोबारों में लगाया गया तथा इस नेटवर्क में और कौनकौन लोग शामिल हैं।

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