सुबह उठते ही ब्रश करना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. आमतौर पर हम टूथब्रश और टूथपेस्ट की मदद से दांतों की सफाई करते हैं, ताकि दांतों पर जमी गंदगी और बैक्टीरिया दूर हो सकें. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका टूथब्रश खुद बिजली बनाकर दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है? सुनने में ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसी ही एक नई तकनीक वाला टूथब्रश तैयार किया है.

कमाल की बात ये है कि इस ब्रश को चलाने के लिए बैटरी या बिजली के किसी बाहरी स्रोत की जरूरत नहीं होती. आप जैसेजैसे इससे दांत साफ करते हैं, ये खुद बिजली पैदा करता है और उसी की मदद से नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया पर असर डालता है. इस नए टूथब्रश को लेकर इसलिए भी चर्चा हो रही है, क्योंकि यह सिर्फ दांतों पर जमी गंदगी हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कैविटी यानी दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी से जुड़े बैक्टीरिया को भी कम करने की क्षमता दिखाता है.
PVDF से बनाया गया है ब्रिसल्स
लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का लैब और इंसानों पर परीक्षण किया है. शुरुआती नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. रिसर्च में पाया गया कि इस ब्रश से दांतों पर जमा बैक्टीरिया की परत कम करने में मदद मिली. हालांकि, इसे अभी पूरी तरह सुरक्षित और आम इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं माना जा सकता. इस नए टूथब्रश की सबसे खास बात इसकी ब्रिसल्स यानी दांत साफ करने वाले रेशे हैं. इन्हें पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड नाम के खास पदार्थ से बनाया गया है.
कैसे काम करता है ये ब्रश?
पॉलीविनाइलिडीन फ्लोराइड ऐसा पदार्थ है, जो मुड़ने या दबाव पड़ने पर बिजली पैदा कर सकता है. जब कोई व्यक्ति इस टूथब्रश से दांत साफ करता है, तो इसके रेशे बारबार मुड़ते हैं. इसी हलचल से छोटी मात्रा में बिजली पैदा होती है. इस प्रक्रिया को पाईजोइलेक्ट्रिक प्रभाव कहा जाता है. इस बिजली की मदद से मुंह में मौजूद लार और पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया होती है. इससे रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज नाम के सक्रिय अणु बनते हैं, जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
दांतों की सड़न, मसूड़ों के बैक्टीरिया पर असर
वैज्ञानिकों ने इस टूथब्रश का परीक्षण दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले दो खास तरह के बैक्टीरिया पर किया. इनमें पहला स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स है, जो दांतों में कैविटी और सड़न पैदा करने में अहम भूमिका निभाता है. दूसरा पोर्फाइरोमोनास जिंजिवालिस है, जिसका संबंध मसूड़ों की बीमारी से है. लैब में किए गए परीक्षण में इस नए टूथब्रश ने स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स के आधे से ज्यादा बैक्टीरिया को खत्म कर दिया.
115 लोगों पर भी किया गया परीक्षण
वहीं, मसूड़ों की बीमारी से जुड़े बैक्टीरिया का स्तर 78 फीसदी तक कम हुआ. इसके मुकाबले सामान्य नायलॉन ब्रश का असर काफी कम था. शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि इस तकनीक से दांतों पर जमा बैक्टीरिया की परत यानी प्लाक को हटाने में मदद मिली. हालांकि, ये नतीजे शुरुआती परीक्षणों के हैं और इन्हें बड़े स्तर पर साबित करना अभी बाकी है. वैज्ञानिकों ने इस टूथब्रश की क्षमता को समझने के लिए 115 लोगों पर भी परीक्षण किया. इन सभी लोगों को मसूड़ों में सूजन या दांतों की सड़न जैसी समस्याएं थीं.
परीक्षण के रिजल्ट में क्या आया?
इन्हें दो समूहों में बांटा गया. एक समूह को नया बिजली पैदा करने वाला टूथब्रश दिया गया, जबकि दूसरे समूह ने सामान्य टूथब्रश का इस्तेमाल किया. दोनों समूहों ने दिन में दो बार लगातार तीन महीने तक ब्रश किया. इसके बाद सामने आया कि नए टूथब्रश का इस्तेमाल करने वाले लोगों के दांतों पर प्लाक कम जमा हुआ. उनके मसूड़ों में सूजन और खून आने की समस्या भी दूसरे समूह के मुकाबले कम देखी गई. इसके अलावा, उनके मुंह में नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया का स्तर कम और फायदेमंद बैक्टीरिया का स्तर ज्यादा पाया गया.



