
लखनऊ, अमृत विचार : साइटिका, सर्वाइकल और कमर दर्द अब जिंदगी भर झेलने वाली समस्या नहीं रह गई है। आधुनिक एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के जरिए वर्षों पुराने दर्द से मिनटों में राहत मिल जाती है। महज 5 से 6 मिलीमीटर के छोटे चीरे से रीढ़ की हड्डी में दबी नसों को दबाव मुक्त किया जा रहा है। इस तकनीक में रक्तस्राव बेहद कम होता है, मांसपेशियों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है और अधिकांश मरीज 24 से 48 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी लेकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
यह जानकारी रोहिलखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी, बरेली के रोबोटिक एंड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल ने रविवार को एंडोस्पाइन2 कार्यशाला के दूसरे और अंतिम दिन वैज्ञानिक सत्र में दी। हजरतगंज स्थित निजी होटल में आयोजित वैज्ञानिक सत्र में उन्होंने बताया कि स्लिप डिस्क या स्पाइनल स्टेनोसिस के कारण साइटिक नर्व दबने पर साइटिका का दर्द शुरू हो जाता है। यह दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों और पैर तक पहुंचता है। एंडोस्कोपिक तकनीक में कैमरा और विशेष उपकरणों की मदद से दबी हुई नस तक पहुंचकर उस पर पड़ रहे दबाव को हटाया जाता है। नस मुक्त होते ही मरीज को दर्द से राहत मिलने लगती है।
अहमदाबाद से आए स्पाइन सर्जन डॉ. भूपेश पटेल ने बताया कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में गर्दन की डिस्क घिसने या गद्दी फटने से नस पर दबाव पड़ जाता है, जिससे गर्दन, कंधे और हाथों में दर्द, झनझनाहट तथा कमजोरी महसूस होती है। एंडोस्कोपिक तकनीक से दबाव बना रही डिस्क या गद्दी के टुकड़े को हटाकर नस को दबाव मुक्त किया जाता है। जरूरत पड़ने पर स्क्रू भी लगा दिया जाता है, इसमें बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती और संक्रमण व रक्तस्राव का खतरा भी काफी कम रहता है।
कार्यशाला मेंकार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. अचल गुप्ता ने कहा कि बदलती जीवनशैली, घंटों कंप्यूटर और मोबाइल के सामने बैठना, गलत पोश्चर, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण स्पाइन संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि हर मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। शुरुआती अवस्था में संतुलित आहार, दवाएं, फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम, सही पोश्चर और वजन नियंत्रित रखने से अधिकांश मरीजों को राहत मिल जाती है। इसके बाद भी यदि लंबे समय तक दर्द बना रहे, हाथ या पैर में कमजोरी, सुन्नपन या चलनेफिरने में दिक्कत हो तथा एमआरआई में नस पर दबाव की पुष्टि हो, तभी एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के जरिए सुरक्षित इलाज मिल जाता है। उन्होंने बताया की आयुष्मान योजना अंतर्गत कई अस्पतालों में इलाज मुफ्त मिलता है।
लोकल एनेस्थीसिया में भी संभव है स्पाइन सर्जरी
डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि जिन बुजुर्ग मरीजों को पूर्ण एनेस्थीसिया देना जोखिम भरा होता है, उनके लिए अब लोकल एनेस्थीसिया में भी एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी संभव है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से स्पाइन सर्जरी और अधिक सटीक व सुरक्षित हो रही है।



