TrendingUttar Pradesh

एंडोस्पाइन-26 : कमर दर्द और साइटिका से राहत! KGMU में डॉक्टरों को सिखाई गई रीढ़ की दूरबीन सर्जरी की नई तकनीक

एंडोस्पाइन-26 : कमर दर्द और साइटिका से राहत! KGMU में डॉक्टरों को सिखाई गई रीढ़ की दूरबीन सर्जरी की नई तकनीक

लखनऊ, अमृत विचार: मौजूदा दौर में बहुत से मरीज कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याओं से परेशान हैं। कुछ मरीजों में कमर का दर्द पैरों तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है कि रीढ़ की हड्डी के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा होता है। ऐसे मरीजों के लिए अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक बेहद कारगर है।

यह जानकारी शनिवार को केजीएमयू के एनाटॉमी विभाग में कैडेवर आधारित हैंड्सऑन लाइव सर्जरी प्रशिक्षण देते हुए रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज के एंडोस्कोपिक एंड रोबोटिक स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. वरुण अग्रवाल ने दी है।

 

डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि एंडोस्कोपिक तकनीक में मरीज की सर्जरी दूरबीन के जरिये की जाती है। जिसमें बहुत ही छोटा चीरा लगाया जाता है। जिससे मरीज बहुत जल्द स्वस्थ होता है और अधिकांश मामलों में मरीज सुबह आता है और शाम तक अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि पहले ओपन सर्जरी के जरिये रीढ़ की हड्डी की समस्या दूर की जाती थीं। ओपन सर्जरी में लोगों को डर भी लगता था, लोग सोचते थे कि कहीं कोई दिक्कत न हो जाये, लेकिन दूरबीन विधि से किसी प्रकार की दिक्कत की आशंका नहीं रहती है।

दरअसल, एंडोस्कोपी में मानव कौशल के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑगमेंटेड रियलिटी के समन्वय” विषय पर आयोजित दो दिवसीय एंडोस्पाइन26 कार्यशाला में पहले दिन डॉ. वरुण अग्रवाल ने कैडेवर पर एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए रीढ़ की हड्डी में दब रही नसों को सुरक्षित तरीके से मुक्त करने की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया।

एंडोस्कोपी में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं

डॉ. वरुण अग्रवाल बताते हैं कि इस तकनीक में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं पड़ती और मरीज तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।

एंडोस्पाइन26 के हैंड्सऑन कैडेवर वर्कशॉप में डॉ. अचल गुप्ता, प्रो. नवनीत कुमार और डॉ. वरुण अग्रवाल

 

आधुनिक तकनीकों से युवा डॉक्टरों और स्पाइन सर्जनों को परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला के आयोजन सचिव और राजभारती मेडिकल फाउंडेशन के डॉ. अचल गुप्ता और डॉ. वरुण अग्रवाल सहित केजीएमयू और देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने एंडोस्कोपिक फ्यूजन सर्जरी से जुड़ी आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया। जिसमें 100 से अधिक डॉक्टरों ने इस तकनीक को सीखा है। इस दौरान उपकरणों के उपयोग, रोगी की सही पोजिशनिंग, एनेस्थीसिया, ऑपरेटिव तकनीक और संभावित जोखिम के प्रबंधन पर जानकारी भी दी गई।

स्पाइन से जुड़ी जटिल बीमारियों के उपचार विचारविमर्श 

शाम को आयोजित वैज्ञानिक सत्र में स्पाइन से जुड़ी जटिल बीमारियों, नई उपचार पद्धतियों और भविष्य की तकनीकों पर विशेषज्ञों ने विचारविमर्श किया। केजीएमयू के एनाटॉमी विभागा के एचओडी प्रो. नवनीत कुमार चौहान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी उभरती तकनीकें भविष्य में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी को और अधिक सटीक, सुरक्षित तथा प्रभावी बनाएंगी।

वहीं केजीएमयू के आर्थोपेडिक सर्जन प्रो. शाह वली उल्लाह ने कहा कि आधुनिक तचकनीक और प्रशिक्षित सर्जनों के समन्वय से स्पाइन रोगियों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके अलावा डॉ.साई दिलीप, डॉ.अमित देवल, डॉ. लवकुश पांडेय, डॉ. अहमद अंसारी, डॉ. फैसल अहमद ने भी इस विधि के फायदे बताये हैं।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply