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10 दिन अंधेरी सुरंग में फंसे रहे इंजीनियर संजय साह, ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप बना सहारा; जानिए क्या है इसकी शक्ति..

10 दिन अंधेरी सुरंग में फंसे रहे इंजीनियर संजय साह, ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप बना सहारा; जानिए क्या है इसकी शक्ति..

नेपाल के रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में करीब 10 दिनों तक फंसे रहने के बाद इंजीनियर संजय साह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इतने लंबे समय तक अंधेरी सुरंग में बिना सामान्य सुविधाओं के जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करना किसी के लिए भी बेहद मुश्किल स्थिति थी।

संजय साह के मुताबिक, इस कठिन समय में उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप करते रहे। उनका कहना है कि महामंत्र के जाप से उन्हें मानसिक हिम्मत मिली और मुश्किल हालात में धैर्य बनाए रखने की ताकत मिली। रेस्क्यू के बाद उन्होंने इस अनुभव को जिंदगी का दूसरा मौका बताया।

क्या है हरे कृष्ण महामंत्र?

हरे कृष्ण महामंत्र वैष्णव परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के नामों का स्मरण करने वाला प्रसिद्ध मंत्र है। इसे आमतौर पर इस तरह जपा जाता है—

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।।

यह मंत्र 16 नामों से मिलकर बना है और गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

यह महामंत्र किसने दिया?

इस मंत्र को किसी एक व्यक्ति द्वारा नया बनाया गया मंत्र नहीं माना जाता। इसकी परंपरा प्राचीन वैष्णव भक्ति से जुड़ी हुई है। हालांकि, इसे व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाने का विशेष श्रेय श्री चैतन्य महाप्रभु को दिया जाता है।

चैतन्य महाप्रभु ने भगवान के नाम-स्मरण और संकीर्तन को भक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया। बाद में श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने इसी महामंत्र को दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया और 1966 में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस यानी ISKCON की स्थापना की।

महामंत्र की शक्ति क्या मानी जाती है?

भक्ति परंपरा में भगवान के नाम का जाप मन को एकाग्र करने और भीतर से शांति व साहस पाने का माध्यम माना जाता है। लगातार मंत्र का स्मरण करने से व्यक्ति का ध्यान डर और तनाव से हटकर एक आध्यात्मिक केंद्र पर टिक सकता है।

संजय साह के मामले में भी यह महामंत्र उनके लिए कठिन परिस्थितियों में मानसिक सहारे का माध्यम बना। करीब 10 दिनों तक सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्हें न तो यह पता था कि मदद कब पहुंचेगी और न ही बाहर की स्थिति की पूरी जानकारी थी। ऐसे समय में जाप ने उन्हें उम्मीद और धैर्य बनाए रखने में मदद की।

हालांकि, महामंत्र की आध्यात्मिक शक्ति आस्था का विषय है। इसे वैज्ञानिक रूप से किसी आपदा में जीवन बचाने वाला प्रमाणित उपाय नहीं कहा जा सकता। लेकिन प्रार्थना, मंत्र-जाप और ध्यान जैसी आध्यात्मिक गतिविधियां कई लोगों को कठिन परिस्थितियों में मानसिक संबल और उम्मीद देने का अनुभव कराती हैं।

संजय साह की कहानी में सबसे खास बात

हादसे के समय सुरंग में करीब 40 से 45 लोग मौजूद बताए गए। संजय के पास कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी थी। अचानक बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग में घुसने लगा तो उन्होंने पहले वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए कहा।

दूसरों को सुरक्षित रास्ते की ओर भेजने के दौरान वह खुद सुरंग के अंदर फंस गए। इसके बाद करीब 10 दिनों तक उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

इन मुश्किल दिनों में उन्होंने जिस तरह उम्मीद बनाए रखी और लगातार महामंत्र का जाप किया, वह उनकी कहानी का सबसे भावुक पहलू बन गया।

कभी-कभी मुश्किल समय में इंसान के पास परिस्थितियां बदलने का कोई रास्ता नहीं होता, लेकिन उम्मीद बनाए रखने का एक सहारा जरूर होता है। संजय साह के लिए उस अंधेरी सुरंग में ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप ऐसा ही एक सहारा बना।

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