BusinessIndia

EPFO: PF सिर्फ बुढ़ापे का सहारा नहीं! अनहोनी या हादसे की स्थिति में आपके परिवार को ऐसे मिलती है हर महीने पेंशन

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत कटने वाले पीएफ को ज्यादातर नौकरीपेशा लोग सिर्फ बुढ़ापे का सहारा मानते हैं. आम धारणा यही है कि 58 साल की उम्र के बाद ही एम्प्लॉई पेंशन स्कीम के पैसे का लाभ मिलता है. लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है. दरअसल, ईपीएस महज एक रिटायरमेंट फंड नहीं है, बल्कि यह एक बेहद मजबूत सामाजिक सुरक्षा चक्र है. नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी हो जाए, जैसे असमय मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता, तो यही योजना उसके पूरे परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा बन जाती है. एक कर्मचारी के तौर पर आपको यह जानना चाहिए कि मुश्किल वक्त में आपका पीएफ खाता किस तरह आपके परिवार की ढाल बनता है.

EPFO: PF सिर्फ बुढ़ापे का सहारा नहीं! अनहोनी या हादसे की स्थिति में आपके परिवार को ऐसे मिलती है हर महीने पेंशन

समय से पहले पेंशन लेने का विकल्प

नियमानुसार, अगर किसी कर्मचारी ने ईपीएस में लगातार 10 साल तक अपना योगदान दिया है, तो वह 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर मासिक पेंशन पाने का कानूनी रूप से हकदार हो जाता है. हालांकि, आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए 50 साल की उम्र के बाद भी ‘अर्ली पेंशन’ यानी समय से पहले पेंशन निकालने की सुविधा दी गई है. लेकिन यहां एक तकनीकी पेंच है. अगर आप तय उम्र से पहले यह राशि निकालते हैं, तो तय समय से पहले निकासी के कारण हर साल के हिसाब से पेंशन की कुल रकम में कुछ प्रतिशत की कटौती कर दी जाती है.

नौकरी के दौरान अपाहिज होने पर नियम

जीवन में दुर्घटनाएं कभी बताकर नहीं आतीं. अगर नौकरी के दौरान कोई कर्मचारी किसी हादसे या बीमारी की वजह से स्थायी रूप से पूर्ण दिव्यांग हो जाता है, तो ईपीएस के नियम पूरी तरह बदल जाते हैं. ऐसी दुखद स्थिति में डिसेबिलिटी पेंशन का प्रावधान है. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इसमें सामान्य रिटायरमेंट वाली 10 साल की नौकरी की शर्त लागू नहीं होती. इसका सीधा उद्देश्य उस कर्मचारी को तत्काल वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, जिसकी शारीरिक अक्षमता के कारण कमाने की ताकत छिन गई हो.

मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक सुरक्षा

ईपीएस 1995 योजना की असली ताकत इसका ‘फैमिली पेंशन’ मॉडल है. यह सिर्फ कर्मचारी के जीवित रहने तक सीमित नहीं है. दुर्भाग्यवश यदि कर्मचारी का निधन हो जाता है, तो योजना के तहत उसके पात्र परिजनों को मासिक पेंशन का लाभ दिया जाता है. इसके दायरे में जीवनसाथी के लिए पेंशन, बच्चों की परवरिश के लिए चाइल्ड पेंशन के साथ कुछ विशेष परिस्थितियों में अनाथ बच्चों के लिए भी वित्तीय सहायता शामिल है. यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ इसे केवल एक आम सेविंग अकाउंट मानने की भूल करने से मना करते हैं.

नॉमिनी की गलतफहमी समेत कागजी गलतियों का प्रभाव

पीएफ खाते को लेकर एक बहुत बड़ी गलतफहमी यह है कि जिसे नॉमिनी बना दिया गया, सारा पैसा सीधे उसी के खाते में चला जाएगा. ईपीएस में पेंशन प्राप्त करने का प्राथमिक अधिकार योजना के नियमों द्वारा तय किए गए परिवार के पात्र सदस्यों को ही होता है. यदि कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना दे, तो सिर्फ नाम दर्ज होने से उसे पेंशन का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता.

इसके अलावा, आपके नाम, जन्मतिथि, आधार कार्ड की जानकारी, बैंक अकाउंट या सर्विस रिकॉर्ड की छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक भी पेंशन क्लेम को अटका सकती है. नौकरी बदलते समय पुराने पीएफ को सही से ट्रांसफर न करना या फॉर्म11 में गलत जानकारी भरना भविष्य में भारी पड़ता है.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply