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​अमेरिकी झटके के बाद भी बाजार में बहार, PERM बैन के बावजूद क्यों दौड़ रहे टेक शेयर?

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गजब की तेजी देखने को मिली. शुक्रवार 9 अक्टूबर को जब बाजार खुला, तो शुरुआती मिनटों में मामूली सुस्ती जरूर दिखी, लेकिन थोड़ी ही देर में खरीदारों ने पूरा माहौल बदल दिया. सुबह करीब 9:16 बजे सेंसेक्स 321 अंक चढ़कर 71,914 पर पहुंचा, तो निफ्टी भी 117 अंक की बढ़त के साथ 22,349 के स्तर पर आ गया. इसके बाद बाजार में हल्का उतारचढ़ाव आया, मगर सूचकांक फिर संभलकर दौड़ने लगे. सुबह 10:30 बजे तक सेंसेक्स 900 अंकों की छलांग लगाकर 73,408 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 260 अंक मजबूत होकर 22,500 के करीब ट्रेड करने लगा. इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ आईटी कंपनियों का रहा.

​अमेरिकी झटके के बाद भी बाजार में बहार, PERM बैन के बावजूद क्यों दौड़ रहे टेक शेयर?

शुरुआती उतारचढ़ाव के बाद बाजार में तेज रिकवरी

बाजार में आई इस बहार की अगुवाई आईटी सेक्टर के शेयरों ने की. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , इंफोसिस व कोफोर्ज समेत आईटी इंडेक्स के लगभग सभी शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. सबसे ज्यादा उछाल TCS के शेयरों में दिखा, जो 4.67 फीसदी की छलांग लगाकर 2,173 रुपये के भाव पर पहुंच गया. इसके अलावा इंफोसिस, कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स व विप्रो में 3 फीसदी से ज्यादा की मजबूती नजर आई. वहीं एचसीएल टेक व टेक महिंद्रा के शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए. निवेशकों की ये जोरदार लिवाली देखकर हर कोई हैरान था, क्योंकि अमेरिका से आई एक पाबंदी की खबर के बीच ये खरीदारी हो रही थी.

अमेरिकी PERM बैन पर TCS का जवाब

दरअसल, अमेरिका के लेबर सेक्रेटरी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय आईटी कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया है. अमेरिकी श्रम विभाग अब इंफोसिस, TCS, विप्रो व एचसीएल टेक से जुड़े नए लेबर सर्टिफिकेशन आवेदन स्वीकार नहीं करेगा. पहले से लंबित फाइलों पर भी काम रोक दिया गया है. बाजार को आशंका थी कि इस कदम से कंपनियों को बड़ा नुकसान होगा.

मगर 9 अक्टूबर की सुबह TCS ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर दिया. कंपनी ने कहा कि वो अमेरिकी नियमों का पूरा पालन करेगी. TCS ने बताया कि अमेरिका में उसकी नीति स्थानीय लोगों को नौकरी देने पर आधारित है, जिसके लिए वो वहां कैंपस हायरिंग मॉडल अपनाती है. अमेरिका में कंपनी के 31 ऑफिस व डिलीवरी सेंटर हैं, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय स्टाफ तैनात है. इसके साथ ही अगले पांच साल में 15,000 अतिरिक्त स्थानीय लोगों को नौकरी देने की योजना है. पिछले दो साल में कंपनी के PERM आवेदन सिंगल डिजिट में थे, इसलिए इस निलंबन से उसके कामकाज पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

15 फीसदी बढ़ा मुनाफा, AI कारोबार में भारी उछाल

शेयरों में आई इस तेजी की सबसे ठोस वजह TCS के दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजे रहे. जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 15 फीसदी बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल समान अवधि में 12,075 करोड़ रुपये था. कंपनी का रेवेन्यू भी 11.22 फीसदी बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये रहा.

कंपनी की कमाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का योगदान बेहद खास रहा. TCS के कुल रेवेन्यू में करीब 10 फीसदी हिस्सा AI कारोबार से आया. कंपनी का सालाना अनुमानित AI रेवेन्यू 2.6 अरब डॉलर से बढ़कर 3.1 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आरती सुब्रमण्यम के मुताबिक, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग व लाइफ साइंसेज जैसे क्षेत्रों में AI से होने वाली कमाई सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही है.

दो बड़े अंतरराष्ट्रीय सौदे, शेयरधारकों को मिला डिविडेंड

मजबूत नतीजों के साथ कंपनी ने दो बड़े रणनीतिक सौदे भी किए हैं. TCS ने पोर्श के साथ 5 साल की पार्टनरशिप की है व उसकी कंसल्टिंग कंपनी MHP के अधिग्रहण का समझौता किया है. इसके अलावा, बेस्ट बाय के भारत स्थित सेंटर को लेकर उसे एआई कैपेबिलिटी सेंटर में बदला जाएगा. सीईओ के. कृतिवासन ने कहा कि ये सौदे आम आईटी सेवाओं से बिल्कुल अलग हैं, जो ग्राहकों को बड़े पैमाने पर AI अपनाने में मदद करेंगे.

कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए 1 रुपये की फेस वैल्यू पर प्रति शेयर 12 रुपये के दूसरे अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है. इसके लिए रिकॉर्ड डेट 14 अक्टूबर, 2026 तय की गई है, जबकि पात्र शेयरधारकों को ये डिविडेंड 30 अक्टूबर, 2026 को दिया जाएगा. इन्हीं मजबूत वजहों से अमेरिकी वीजा पाबंदी का डर पीछे छूट गया व आईटी शेयरों ने दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त रैली ला दी.

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