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Exclusive: राष्ट्रीय खेल विकास निधि से RSS से जुड़े संगठनों को करोड़ों रुपयों की मदद, संसदीय समिति ने जताई चिंता

देश में खिलाड़ियों और खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए बनाए गए नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड से राष्ट्रीय स्वंयसेवक से जुड़े संगठनों को करोड़ों रुपये की मदद दिये जाने पर सवाल उठे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान और छत्तीसगढ़ में RSS से संबद्ध दो संस्थाओं को खेल सुविधाओं के निर्माण और प्रतियोगिताएं कराने के लिए फंड दिया गया।

Exclusive: राष्ट्रीय खेल विकास निधि से RSS से जुड़े संगठनों को करोड़ों रुपयों की मदद, संसदीय समिति ने जताई चिंता
Exclusive: राष्ट्रीय खेल विकास निधि से RSS से जुड़े संगठनों को करोड़ों रुपयों की मदद, संसदीय समिति ने जताई चिंता

खेल मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच RSS से जुड़ी संस्थाओं को स्वीकृत 5.07 करोड़ रुपये में से करीब 2.66 करोड़ रुपये जारी किये गए। यह रकम ऐसे समय दी गई, जब खिलाड़ियों के लिए बने इस फंड में सरकार का योगदान घट रहा था और संसदीय समिति इसके इस्तेमाल पर चिंता जता चुकी थी।

वनवासी कल्याण परिषद को 4.82 करोड़

रिकॉर्ड बताते हैं कि मार्च 2024 में राजस्थान के उदयपुर जिले के कोटड़ा स्थित वनवासी कल्याण परिषद को 4.82 करोड़ रुपये मंजूर किये गए। इसमें से 2.41 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गए। यह रकम दर्शक दीर्घा, यूटिलिटी बिल्डिंग, एथलेटिक ट्रैक के पुनर्निर्माण और प्रैक्टिस फुटबॉल ग्राउंड तैयार करने के लिए दी गई।

वनवासी कल्याण परिषद राजस्थान के आदिवासी इलाकों में खेल केंद्र, हॉस्टल और स्वास्थ्य सेवाएं चलाती है। वनवासी कल्याण परिषद की वेबसाइट के मुताबिक, यह संगठन अनुसूचित जनजातियों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल गतिविधियों पर काम करता है। संगठन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा माना जाता है।

वनवासी कल्याण समिति को 25 लाख

इसी तरह छत्तीसगढ़ के जशपुर स्थित वनवासी कल्याण समिति को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित करने के लिए 202425 में 18.75 लाख रुपये दिये गए। अगले वित्त वर्ष में इसी संस्था को एक और टूर्नामेंट के आयोजन के लिए 6.25 लाख रुपये मिले। संगठन अपनी वेबसाइट पर खुद को आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए काम करने वाला संस्थान बताता है।

NSDF का उद्देश्य खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग, कोचिंग और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी फंड से टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी योजनाएं भी संचालित होती हैं। ऐसे में गैरसरकारी और वैचारिक संगठनों को फंड दिये जाने पर सवाल उठ रहे हैं। खेल मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, यह फंड खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग, वैज्ञानिक सहयोग और खेल ढांचे के विकास के लिए बनाया गया था।

हालांकि, नियमों में खेलों को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को भी सहायता देने का भी प्रावधान है। आलोचकों का सवाल है कि क्या इस फंड का इस्तेमाल वैचारिक या संगठनात्मक रूप से जुड़े संस्थानों तक पहुंचना चाहिए, खासकर तब जब देश के कई हिस्सों में खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।

संसद की स्थायी समिति ने फंड के इस्तेमाल पर उठाये सवाल

अगस्त 2025 में संसद में पेश स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी NSDF के इस्तेमाल पर सवाल उठाये गए थे। स्थायी समिति ने कहा था कि फंड का इस्तेमाल ‘सख्ती से खेल विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और कोचिंग’ पर ही होना चाहिए। रिपोर्ट में रिहायशी कॉलोनियों और सिविल सेवा संस्थाओं को फंड दिये जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई थी।

रिकॉर्ड बताते हैं कि 202324 में NSDF में 85.26 करोड़ रुपये का योगदान मिला था, लेकिन 202526 तक यह घटकर 37.02 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद गैरपारंपरिक लाभार्थियों को फंड जारी किये जाते रहे। खेल मंत्रालय ने इस मामले में भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

खेल मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने ‘द इंडिनय एक्सप्रेस’ कहा कि खेल फंड का इस्तेमाल उन संस्थाओं के लिए होना चाहिए जो सीधे खिलाड़ियों और खेल प्रतिभाओं के विकास से जुड़ी हों। उन्होंने कहा कि NSDF के पैसे का इस्तेमाल उन परियोजनाओं के लिए ‘अनैतिक’ है जो सिर्फ नौकरशाहों के फायदे के लिए हैं और आम लोगों के लिए खुले नहीं हैं।

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खिलाड़ियों को तैयार करने और ओलंपिक मिशन को मजबूत करने के लिए बने NSDF फंड से दिल्ली के न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स, CSOI और अन्य अफसर संस्थानों की खेल सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किये गए। संसदीय समिति ने इस तरह के इस्तेमाल पर चिंता जताई है।

Exclusive: भारत में क्रिकेट को सरकारी मदद नहीं, लेकिन विदेश में बांटी गईं करोड़ों की क्रिकेट किट

नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड से जमैका, मालदीव और सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस के क्रिकेट बोर्डों को क्रिकेट किट और खेल सामग्री भेजने पर करीब 1.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सवाल उठ रहे हैं कि जब भारत सरकार खुद देश में क्रिकेट को फंड नहीं देती, तब विदेशी क्रिकेट संस्थाओं को सरकारी खेल फंड से मदद क्यों दी गई।

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