BusinessIndia

Explained: छोटे गैस सिलेंडर्स का क्रेज खत्म? 80% गिरी अप्पू-छोटू-मुन्ना की डिमांड

ईरान वॉर के दौरान ना सिर्फ कच्चे तेल बल्कि गैस की कीमतों में भी काफी इजाफा देखने को मिला है. एलपीजी की सप्लाई काफी होने के कारण इस दौरान गैस सिलेंडर की कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है. यहां तक कि अप्पूछोटूमुन्ना जैसे नामों से मशहूर हुए 5 किलो वाले गैस सिलेंडर के दाम भी आसमान पा पहुंच गए. जिसकी वजह से इनकी डिमांड में काफी गिरावट देखने को मिली है. लाइव मिंट की रिपोर्ट में कम से कम चार डिस्ट्रीब्यूटर्स के हवाले से कहा गया है कि बच्चों के नाम पर रखे गए इन पोर्टेबल गैस सिलेंडरों की मांग वेस्ट एशिया वॉर के बाद कीमतें दोगुनी होने पर गिर गई.

Explained: छोटे गैस सिलेंडर्स का क्रेज खत्म? 80% गिरी अप्पू-छोटू-मुन्ना की डिमांड

5 किलोग्राम के इन सिलेंडरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रवासी मजदूर और छात्र करते हैं, और इन्हें सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर आसानी से खरीदा जा सकता है. मांग में आई इस भारी गिरावट से शहरों में मजदूरों की वापसी पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कुकिंग गैस की कमी के दौरान वे शहर छोड़कर चले गए थे. मांग में गिरावट और कीमतों में बढ़ोतरी एक ही समय पर हुई. दिल्ली में, इन छोटे सिलेंडरों—जिन्हें तकनीकी रूप से फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर कहा जाता है—की कीमत मार्च में 323 रुपए से बढ़कर जून में 821.50 रुपए हो गई. FTL सिलेंडर ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ ‘छोटू’ और ‘मुन्ना’ , ‘भारतगैस मिनी’ और ‘HP गैस अप्पू’ जैसे ब्रांड नामों से बेचती हैं.

80 से 90 फीसदी तक कम हुई डिमांड

दिल्ली के LPG डिस्ट्रीब्यूटर ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि संकट शुरू होने के तुरंत बाद FTL की मांग बहुत ज्यादा थी, लेकिन अब लोग अपने सिलेंडर रिफिल कराने के लिए वापस नहीं आ रहे हैं, खासकर मई के बाद से. पूरे देश में FTL सिलेंडरों की मांग में लगभग 80 फीसदी की गिरावट आई है, और कुछ मामलों में तो यह 90 फीसदी तक है.

FTL सिलेंडर एक पोर्टेबल कुकिंग गैस कैनिस्टर है जिसे खरीदने के लिए सिर्फ आधार वेरिफिकेशन की जरूरत होती है. यह 2kg और 5kg के सुविधाजनक साइज में आता है, जो इसे छात्रों, प्रवासी मज़दूरों और बारबार जगह बदलने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा बनाता है. इसे कमर्शियल LPG की कैटेगिरी में रखा गया है और इस पर कोई सब्सिडी नहीं मिलती है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने वॉर के दौरान 5kg के सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई थी.

बुधवार को, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतें कम कर दीं, और नतीजतन, दिल्ली में FTL सिलेंडर अब लगभग 805.50 रुपए में बिकेंगे. हालांकि, LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बताया कि नए कनेक्शन के लिए FTL सिलेंडर की कीमत बुधवार से लगभग 160 रुपए बढ़ा दी गई है. दिल्ली में नए FTL सिलेंडर कनेक्शन की कीमत अब 1,929.50 रुपए है, जबकि जून में यह 1,765.50 रुपए थी.

काफी कमी

LPG डिस्ट्रीब्यूटरशिप के मैनेजर रंजीत सिंह ने लाइव मिंट की रिपोर्ट में कहा कि हाल के हफ्तों में नए सिलेंडर की बिक्री और FTL रिफिल, दोनों में काफी कमी आई है. उनकी एजेंसी में बिक्री में 40 फीसदी की गिरावट देखी गई है. यह बात इसलिए अहम है क्योंकि 23 मार्च से 22 अप्रैल के बीच लगभग 20 लाख 5kg वाले FTL सिलेंडर बेचे गए थे.

देश में अभी कुल 34 करोड़ घरेलू LPG उपभोक्ता हैं. गौरतलब है कि मार्च की शुरुआत में ग्लोबल सप्लाई की कमी के कारण कमर्शियल LPG सप्लाई रोकने के बाद, सरकार ने 23 मार्च से प्रवासी मजदूरों के लिए FTL सिलेंडर बेचने की इजाजत दी थी.

18 जून को पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि पिछले तीन दिनों में लगभग 1,98,000 FTL सिलेंडर बेचे गए. इसके अलावा, इन सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार और OMC खास कैंप भी लगा रही हैं. मंत्रालय ने 18 जून को बताया कि पिछले तीन दिनों में 1,334 कैंपों के ज़रिए 19,100 से ज़्यादा FTL सिलेंडर बेचे गए.

ऑलइंडिया LPG डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन के उत्तर प्रदेश सर्कल के प्रेसिडेंट जगदीश राज ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी की वजह से प्रवासी मजदूरों के बीच FTL सिलेंडर को बढ़ावा देने का मकसद ही खत्म हो गया है. अब हमें रिफिलिंग के लिए कोई ग्राहक नहीं मिलता, क्योंकि अगर प्रति किलो के हिसाब से देखें तो FTL अब 19kg वाले कमर्शियल सिलेंडर से भी महंगा है.

तिरुवनंतपुरम में एक LPG डिस्ट्रीब्यूटर ने कहा कि उनकी एजेंसी में FTL की कोई नई बिक्री नहीं हो रही है और रिफिल में 20 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है. डिस्ट्रीब्यूटर ने कहा कि अब उपलब्धता कोई समस्या नहीं है. साथ ही, कुछ पेट्रोल पंपों पर छोटे सिलेंडर मिलने से भी LPG एजेंसियों पर मांग पर असर पड़ सकता है. दिल्ली में 19kg वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब लगभग 2,930 रुपए है, जो जून में 3,113.50 रुपए थी. इसका मतलब है 154.2 प्रति किलो, जबकि FTL में वही गैस 161.1 रुपए प्रति किलो पड़ती है.

प्रवासी मज़दूरों का असर

मांग में कमी की एक मुख्य वजह प्रवासी मजदूरोंजैसे कि इंडस्ट्रियल वर्कर, स्ट्रीट फूड वेंडर, रेस्टोरेंट में काम करने वाले और सब्जी बेचने वालेका अपने गृहनगर लौटना है. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट के चेयरमैन एस. इरुदया राजन ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि फ्यूल संकट और कीमतों में बढ़ोतरी ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया, जिसमें प्रवासी भी शामिल हैं.

राजन ने कहा कि वॉर और सप्लाई की दिक्कतों के कारण कारोबार, दुकानें और अन्य कमर्शियल संस्थान बंद हो गए, जिससे लोगों की नौकरियां चली गईं. हर किसी पर कर्ज का बोझ था और हर कोई प्रभावित हुआ. इसलिए, उन्हें वहां से जाना पड़ा. इसका एक उदाहरण केरल है, जहां युद्ध के दौरान मजदूर और कामगार अपने मूल स्थानों पर लौट गए थे.

गैस की कमी और ऊंची कीमतों ने भी फ्यूल पर निर्भर कारोबारों को प्रभावित किया, जिससे रेस्टोरेंट और खानेपीने की जगहों सहित कई छोटे कारोबार बंद हो गए. लुधियाना के उद्योगपति और फेडरेशन ऑफ पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बदीश जिंदल ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि युद्ध के समय जो मजदूर चले गए थे, वे अब वापस आने लगे हैं.

जिंदल ने कहा कि लुधियाना में लगभग 8590 फीसदी इंडस्ट्रियल वर्कर काम पर लौट आए हैं. हालांकि, LPG सिलेंडर रिफिल मिलना अभी भी एक बड़ी चुनौती है. चूंकि इनमें से ज्यादातर मजदूर प्रवासी हैं, इसलिए कई लोगों को मजबूरन अनऑथराइज़्ड रिफिल चैनलों पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां उन्हें 19kg सिलेंडर के लिए 3,500 रुपए से 4,000 रुपए तक चुकाने पड़ते हैं.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply