
Delhi Schools Bomb Threat: दिल्ली के स्कूल और कॉलेज लगातार मिल रहे बम धमकी वाले ई-मेल्स की वजह से चिंता में हैं। इन संदेशों के बाद कई बार छात्रों और स्टाफ को परिसर से बाहर निकालकर सुरक्षा जांच करनी पड़ी। राहत की बात यह है कि अब तक सामने आए मामलों में कोई विस्फोटक नहीं मिला और ज्यादातर धमकियां हॉक्स यानी फर्जी साबित हुई हैं। इसके बावजूद लगातार आ रहे ऐसे ई-मेल सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
फर्जी धमकियों से निपटने के लिए बनेगा खास साइबर सेल
दिल्ली पुलिस ने इस तरह के मामलों की जांच को और मजबूत करने के लिए दिल्ली साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (D4C) में एक विशेष हॉक्स बम ई-मेल इन्वेस्टिगेशन सेल बनाने का फैसला किया है।
यह सेल स्कूल-कॉलेजों के अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों को मिलने वाली बम धमकियों की तकनीकी जांच करेगा। संदिग्ध ई-मेल कहां से भेजा गया, इसके पीछे किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और भेजने वाले तक कैसे पहुंचा जाए, इसकी जांच के लिए साइबर विशेषज्ञ काम करेंगे।
पुलिस VPN, स्पूफ ई-मेल और दूसरी तकनीकी सेवाओं के जरिए भेजे गए संदेशों की निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर टेलीकॉम कंपनियों, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-मेल सेवा प्रदाताओं से भी डिजिटल जानकारी जुटाई जाएगी।
अगस्त में कई स्कूलों को मिले धमकी भरे ई-मेल
दिल्ली में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। 3 अगस्त 2026 को भी राजधानी के कई स्कूलों को बम धमकी वाले ई-मेल मिले थे। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।
सुरक्षा के लिहाज से स्कूलों को खाली कराया गया और पूरे परिसर की तलाशी ली गई। जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ।
पहले भी निशाने पर रहे हैं स्कूल और कॉलेज
दिल्ली में फर्जी बम धमकी वाले ई-मेल कोई नई बात नहीं हैं। इससे पहले भी कई बार स्कूलों और कॉलेजों को इसी तरह के संदेश भेजे जा चुके हैं।
फरवरी 2026 में दिल्ली विधानसभा, लाल किला और कुछ स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल भेजे गए थे। जांच के बाद इन्हें हॉक्स पाया गया था।
अगस्त 2025 में राजधानी के करीब 20 कॉलेजों को ऐसे ई-मेल मिले थे। इनमें जेसस एंड मैरी कॉलेज भी शामिल था। जांच में सामने आया था कि धमकी भेजने के लिए VPN का इस्तेमाल किया गया था।
जुलाई 2025 में भी कुछ ही दिनों के भीतर कई स्कूलों और एक कॉलेज को धमकी भरे संदेश मिले थे। सुरक्षा एजेंसियों ने सभी संस्थानों की जांच की, लेकिन किसी जगह विस्फोटक नहीं मिला।
VPN और गुमनाम ई-मेल बन रहे हैं जांच की चुनौती
साइबर अपराधियों के लिए VPN और गुमनाम ई-मेल सेवाएं उनकी पहचान छिपाने का जरिया बन सकती हैं। इसी वजह से धमकी भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं होता।
हालांकि, डिजिटल जांच के जरिए ई-मेल के तकनीकी रिकॉर्ड, इस्तेमाल किए गए सर्वर और दूसरी जानकारियों को खंगाला जा सकता है। D4C में बनने वाला विशेष सेल इसी तरह की जांच को ज्यादा व्यवस्थित और तेज करने की दिशा में काम करेगा।
क्या बच्चों और अभिभावकों को डरने की जरूरत है?
अब तक सामने आए मामलों में धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की और किसी वास्तविक विस्फोटक का पता नहीं चला। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर धमकी को नजरअंदाज किया जाए।
बम धमकी से जुड़ी किसी भी सूचना को गंभीरता से लेना जरूरी है। स्कूल प्रशासन को तुरंत पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी देनी चाहिए और बिना पुष्टि के अफवाहों को फैलाने से बचना चाहिए।
स्कूलों को भी बढ़ानी होगी साइबर सुरक्षा
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि स्कूल और कॉलेजों को केवल भौतिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।
संस्थानों को संदिग्ध ई-मेल की पहचान के लिए बेहतर फिल्टरिंग सिस्टम, नियमित साइबर सिक्योरिटी ऑडिट और कर्मचारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने चाहिए।
साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए इवैक्यूएशन प्लान और पुलिस-फायर विभाग के साथ समन्वय भी मजबूत रखना जरूरी है।
फर्जी धमकी भी बन सकती है बड़ी परेशानी
भले ही धमकी देने वाला व्यक्ति कोई विस्फोटक न रखे, लेकिन एक फर्जी ई-मेल भी स्कूल, छात्रों, अभिभावकों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। स्कूल खाली कराने से लेकर सुरक्षा जांच तक पूरा तंत्र सक्रिय करना पड़ता है।
ऐसे में दिल्ली पुलिस का विशेष हॉक्स ई-मेल सेल इस तरह की घटनाओं के पीछे मौजूद नेटवर्क और तकनीकी तरीकों की पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल दिल्ली के स्कूल-कॉलेजों में मिल रही बम धमकियों में वास्तविक विस्फोटक मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सुरक्षा और साइबर निगरानी को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है। अब D4C के नए सेल से उम्मीद है कि ऐसे मामलों की जांच तेजी से होगी और धमकी भेजने वालों तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिलेगी।



