
सूरत ग्रामीण पुलिस ने नकली घी बनाने और उसे असली गाय का घी बताकर बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कामरेज तहसील के धोरण पारडी गांव स्थित एक इंडस्ट्रियल यूनिट में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और सोयाबीन तेल से घी तैयार किया जा रहा था. पुलिस ने छापेमारी कर 52.79 लाख रुपये से अधिक का सामान जब्त किया है.
गुप्त सूचना पर पुलिस ने मारा छापा
सूरत ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश गढिया के मार्गदर्शन में लोकल क्राइम ब्रांच की टीम नकली और मिलावटी उत्पादों के खिलाफ अभियान चला रही थी. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि धोरण पारडी गांव की सीमा में हिंदवा ड्रीम्स इंडस्ट्रीज के प्लॉट नंबर G-01 में संदिग्ध घी बनाने और पैक करने का काम चल रहा है. सूचना के आधार पर PSI जे.एल. पटेल के नेतृत्व में टीम ने 15 अगस्त को यूनिट पर छापेमारी की.
लाइसेंस लेकर कर रहा था मिलावट का कारोबार
छापेमारी के दौरान यूनिट का मालिक अंकितकुमार राजेशकुमार मोदी मौके पर मिला. पूछताछ में उसने बताया कि उसने ‘कैवल फूड प्रोडक्ट’ के नाम से घी बनाने का लाइसेंस लिया था. पुलिस के मुताबिक, इसी लाइसेंस की आड़ में वह डेयरी प्रोडक्ट की जगह पाम ऑयल, वनस्पति घी और सोयाबीन तेल को मिलाकर संदिग्ध घी तैयार करता था. इसके बाद इस उत्पाद को ‘Shri ANMOL RATNA COW’s GHEE’ के नाम से अलग-अलग पैकिंग में गाय का घी बताकर बेचा जाता था.
5 टन से ज्यादा माल बरामद
पुलिस ने मौके से पाम ऑयल, वनस्पति तेल और संदिग्ध घी समेत 5 टन से ज्यादा सामग्री बरामद की. जब्त किए गए पूरे मुद्दामाल की कीमत करीब 52,79,761 रुपये बताई गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए फूड एंड ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया. अधिकारियों ने जरूरी सैंपल लेकर उन्हें लैब जांच के लिए भेज दिया है.
एक साल से चल रहा था कारोबार
प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल से यह कारोबार कर रहा था और तैयार माल आसपास के इंडस्ट्रियल इलाकों में सप्लाई करता था. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली घी किन-किन इलाकों और दुकानों तक पहुंचाया गया.



