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UP में परिवारवाद-पीडीए और पंडित पर घमासान, बृजेश पाठक का अखिलेश पर पलटवार; मायावती बोलीं- गिरगिट की तरह रंग बदलती है सपा

उत्तर प्रदेश में राजनीति में इन दिनों जातीय समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए परिवारवाद, ब्राह्मण समाज और लोहिया के विचारों को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं, BSP सुप्रीमो मायावती ने भी सपा पर निशाना साधा है.

UP में परिवारवाद-पीडीए और पंडित पर घमासान, बृजेश पाठक का अखिलेश पर पलटवार; मायावती बोलीं- गिरगिट की तरह रंग बदलती है सपा

BSP सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर समाजवादी पार्टी को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार दिया है. दोनों नेताओं के बयानों में सपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति को निशाने पर लिया गया है.

‘राजनीति में विचारों का जवाब विचारों से दिया जाता है’

बृजेश पाठक ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाना चाहिए, व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से नहीं. उन्होंने समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए सपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.

पाठक ने कहा कि लोहिया परिवारवाद के सबसे बड़े विरोधियों में थे. उनके मुताबिक, लोहिया का स्पष्ट विचार था कि जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि आज लोहिया के नाम पर राजनीति करने वालों ने ही उनके विचारों को सबसे पहले त्याग दिया है.

डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि आज लोहिया स्वयं होते तो परिवारवाद को राजनीति का आधार बनाने वालों को कटघरे में खड़ा करते. उन्होंने कहा कि परिवार को सत्ता दिलाने की राजनीति को लोहिया कभी स्वीकार नहीं करते.

‘ब्राह्मण समाज का हितैषी होने का स्वांग रच रहे अखिलेश’

यही नहीं बृजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर ब्राह्मण समाज को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अखिलेश आज ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन पत्रकारों की जाति पूछकर की गई उनकी कथित टिप्पणी आज भी लोगों को याद है. उन्होंने कहा कि समाज का उत्थान किसी एक परिवार को सत्ता दिलाने से नहीं, बल्कि हर वर्ग को समान अवसर, न्याय और सम्मान देने से होता है.

डिप्टी सीएम ने अपने सार्वजनिक जीवन को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों पर कहा कि इसका मूल्यांकन जनता करती है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हमेशा संगठन, संविधान और जनसेवा को सर्वोपरि रखा है. उनके मुताबिक, व्यक्तिगत आरोप, अपशब्द और दुष्प्रचार न तो सत्य को बदल सकते हैं और न ही जनता का विश्वास.

उन्होंने बीजेपी की राजनीतिक विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित है. इसके विपरीत उन्होंने परिवारवादी राजनीति पर सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखने का आरोप लगाया.उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन विचारों का उत्तर विचारों से और तथ्यों का जवाब तथ्यों से ही दिया जाना चाहिए.

मायावती का सपा पर हमला

इधर BSP सुप्रीमो मायावती ने भी सपा पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति और सिद्धांत पर चलने वाली सर्व समाजहितैषी अंबेडकरवादी पार्टी है. उन्होंनने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में BSP की सरकारें भी इसी आधार पर चलीं. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है.

‘पीडीए में P का मतलब पिछड़ा से पंडित कर दिया’

यही नहीं मायावती ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि सपा पहले पीडीए में पी का मतलब पिछड़ा बताकर प्रचार करती थी, लेकिन अब अपर कास्ट समाज, खासकर ब्राह्मण समाज के बसपा से जुड़ने और इसी आधार पर पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने से विचलित होकर पी का अर्थ पंडित बताने लगी है.

मायावती ने इसे सपा के राजनीतिक छल और छलावे का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष को कुछ समय के लिए फायदा मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज का भला नहीं हो सकता.

‘ऐसी जातिवादी राजनीति से सावधान रहें’

BSP सुप्रीमो ने सर्व समाज के लोगों से ऐसी राजनीति से सावधान रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसकी कथित संकीर्ण जातिवादी राजनीति से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है और यही सर्व समाज के हित में है.

एक ही मुद्दे पर तीनों दलों की अलगअलग सियासी लाइन

बृजेश पाठक के बयान में जहां परिवारवाद बनाम बीजेपी की विचारधारा का मुद्दा प्रमुख रहा, वहीं मायावती ने पीडीए, ब्राह्मण समाज और सपा की जातीय राजनीति को निशाना बनाया. ऐसे में दोनों नेताओं के हमले सपा की उस राजनीतिक रणनीति पर केंद्रित हैं, जिसके जरिए वह पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और अब ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपना सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है.उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर बढ़ती यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है.

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