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FANS ने युवाओं से विभाजनकारी पहचानों से ऊपर उठकर सशक्त, समावेशी एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया

पटियाला : मुल्तानी मल मोदी कॉलेज, पटियाला में “देशहित और नौजवान ” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का आयोजन IQAC एवं Faculty of Social Science द्वारा किया गया।

भारत के निर्माण में युवा विचार प्रवाह के लिए पंजाब में 50 कार्यक्रम की शृंखला मे यह पहला था।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रिंसिपल डॉ. नीरज गोयल के स्वागत भाषण से हुई और पंजाब राज्य पूर्व सूचना आयुक्त डॉ. पवन सिंगला ने विशेष रूप से शिरकत की। FANS के कार्यसमिति सदस्य श्री मनदीप अग्रवाल ने विषय की संकल्पना एव संयोजक का दायित्व निभाया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री विक्रमादित्य सिंह, संगठन सचिव FANS ने युवाओं एवं समाज से राष्ट्रहित में सार्थक योगदान देने तथा भारत को अधिक सशक्त, समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

श्री सिंह ने समाज को जाति, पंथ, समुदाय अथवा अन्य पहचान के नाम पर विभाजित करने के प्रयासों के प्रति सावधान करते हुए विशेष रूप से युवाओं को केवल Gen Z, Gen Alpha जैसी पीढ़ीगत संज्ञाओं के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति से भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की पहली और सबसे महत्वपूर्ण पहचान एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक की होनी चाहिए तथा देश के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी सभी की समान है।

उन्होंने कहा कि भारत विशाल है, लेकिन हमारा लक्ष्य इसे और भी महान, सशक्त, समृद्ध एवं विकसित बनाना होना चाहिए। उन्होने कहा कि निसंदेह पिछले लगभग एक दशक मे देश ने काफी तरक़्क़ी कि है परंतु न केवल इस तरक़्क़ी कि गति को बनाए रखने कि जरूरत है बल्कि इसे लगातार बढ़ते जाने कि आवशयकता है। इसके लिए बेरोजगारी, बेघरपन, गरीबी और शैक्षणिक पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों को समाप्त करने के लिए सामूहिक एवं निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

श्री सिंह ने कहा कि जब हम गरीबी या बेरोजगारी के आंकड़ों की चर्चा करते हैं, तो हम केवल आंकड़ों की बात नहीं कर रहे होते, बल्कि उन लोगों, परिवारों और बच्चों की बात कर रहे होते हैं जो अभाव, अवसरों की कमी और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए प्रत्येक आंकड़े के पीछे छिपे मानवीय पक्ष को समझना आवश्यक है।

पंजाब के गौरवशाली योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब ने राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा, साहस, त्याग और आस्था के संरक्षण में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पंजाब के युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी पिछली पीढ़ियों के त्याग, साहस और राष्ट्रनिष्ठा से प्रेरणा लेकर राष्ट्र के गौरव, एकता और विश्वास की रक्षा की इस महान परंपरा को आगे बढ़ाएं।

युवाओं में आर्थिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री सिंह ने कहा कि आज का युवा क्रिकेट खिलाड़ियों के स्ट्राइक रेट और अन्य आंकड़ों से तो भलीभांति परिचित है, लेकिन देश के अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और संकेतकों की जानकारी से अक्सर अनभिज्ञ रहता है। उन्होंने युवाओं से देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, गरीबी, शिक्षा और विकास से जुड़े आंकड़ों को समझने तथा राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

उन्होंने एक मार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी स्वतंत्रता सेनानी, शहीद चंद्रशेखर आजाद जी की पंजाब की प्रतिमा के समीप कोई बेघर बच्चा रात बिताने को मजबूर हो, तो हमें यह विचार करना चाहिए कि उस महान स्वतंत्रता सेनानी की आत्मा आज की इस स्थिति को देखकर क्या अनुभव करती होगी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब स्वतंत्र भारत में कोई बच्चा शिक्षा, भोजन, आवास, सम्मान और अवसर से वंचित न रहे।

श्री सिंह ने युवाओं में आर्थिक एवं सामाजिक जागरूकता की नई संस्कृति विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम सप्ताह के दिन—सोमवार, मंगलवार और बुधवार—सहज रूप से याद रखते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक भारतीय को देश के महत्वपूर्ण आर्थिक एवं सामाजिक आंकड़ों और चुनौतियों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आंकड़ों की जानकारी पर्याप्त नहीं है; उस जानकारी को राष्ट्र निर्माण की कार्रवाई में परिवर्तित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश को शैक्षणिक पिछड़ेपन, बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सरकार और समाज को मिलकर निरंतर प्रयास करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा भारत होना चाहिए जहां प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रत्येक युवा को अवसर और प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन प्राप्त हो।

अपने संबोधन के समापन में श्री विक्रमादित्य सिंह ने विद्यार्थियों से जागरूक, जिम्मेदार, राष्ट्रनिष्ठ और सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की ज्ञान, कौशल, ऊर्जा और प्रतिबद्धता ही भारत को शीघ्र “विकसित भारत” बनाने की सबसे बड़ी शक्ति है। संगोष्ठी के नियोजन वाईस प्रिंसिपल डॉ जगदीप कौर ,डॉ रोहित सचदेवा डीन, विद्यार्थियों, शिक्षकों, NCC एवं NSS स्वयंसेवकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। कार्यक्रम ने देशभक्ति, राष्ट्रीय उत्तरदायित्व, युवा सहभागिता तथा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर सार्थक विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

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