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FIIs ने मोड़ा भारत से मुंह! 2,00,000 करोड़ की बिकवाली से बाजार में हड़कंप, क्या रिकवरी की है कोई उम्मीद?

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने 2026 में 2.06 लाख करोड़ रुपए के घरेलू शेयर बेचे हैं, और लगातार तीसरे महीने वे नेट सेलर बने हुए हैं. अगर बात मई की करें तो अब तक विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 14,231 करोड़ रुपए की बिकवाली कर डाली है. शुक्रवार को, FIIs ने 4,110.60 करोड़ रुपए के घरेलू शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 6,748.13 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे. घरेलू निवेशकों के जोर लगाने के बावजूद, शुक्रवार को बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई. फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली के चलते यह लगातार दूसरा दिन था जब इंडेक्स नीचे गिरे. निफ्टी 150.50 अंक या 0.62 फीसदी गिरकर 24,176.15 पर बंद हुआ, जबकि BSE सेंसेक्स 516.33 अंक या 0.66% की गिरावट के साथ 77,328.19 पर बंद हुआ.

FIIs ने मोड़ा भारत से मुंह! 2,00,000 करोड़ की बिकवाली से बाजार में हड़कंप, क्या रिकवरी की है कोई उम्मीद?
FIIs ने मोड़ा भारत से मुंह! 2,00,000 करोड़ की बिकवाली से बाजार में हड़कंप, क्या रिकवरी की है कोई उम्मीद?

कब तक रूठे रहेंगे विदेशी निवेशक?

मौजूदा ट्रेंड पर टिप्पणी करते हुए, TrustLine Holdings के CEO एन. अरुणागिरी ने कहा कि सितंबर 2024 से अब तक लगभग 50 अरब डॉलर की बिकवाली के बावजूद घरेलू बाजारों में FIIs की बिकवाली जारी है. यह ऐसे समय हो रहा है जब दक्षिण कोरिया को लगभग 4 अरब डॉलर और ताइवान को लगभग 5.5 अरब डॉलर का निवेश मिला है. अरुणागिरी ने कहा कि भारत को अभी भी उभरते बाजारों के आवंटन में अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है. इससे साफ पता चलता है कि FIIs को फिलहाल आवंटन के नजरिए से भारत उतना आकर्षक नहीं लग रहा है.

नतीजतन, लार्जकैप शेयरों का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है, जबकि घरेलू निवेश के मजबूत फ्लो ने SMID सेगमेंट को सहारा देना जारी रखा है. जब तक FIIs भारत में अपना निवेश ठीकठाक नहीं बढ़ाते, तब तक बाजार में शेयरों का प्रदर्शन काफी हद तक उनकी अपनी खूबियों पर ही निर्भर रहने की संभावना है. यानी बाजार को लार्जकैप शेयरों की तेजी के बजाय कंपनियों की कमाई में स्पष्टता और ‘बॉटमअप’ अवसरों से ही गति मिलेगी.

कौन से फैक्टर रहेंगे अहम

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि आगे चलकर संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों से ही प्रभावित होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में होने वाली प्रगति या गिरावट पर नजर रखना एक अहम कारक होगा. इसका भूराजनीतिक स्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतारचढ़ाव पर गहरा असर पड़ सकता है. मौजूदा समस में खाड़ी देशों का कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

2026 में विदेशी निवेशकों कैसे रहे बिकवाल

मार्च में वॉर की वजह से हुई भारी बिकवाली ने इसे इस साल का सबसे खराब महीना बना दिया, जिसमें 1,17,775 करोड़ रुपए की निकासी देखने को मिली. अप्रैल भी कुछ खास अच्छा नहीं रहा, जिसमें 60,847 करोड़ रुपए की निकासी हुई. विदेशी निवेशक फरवरी में शुद्ध खरीदार बन गए, और घरेलू बाजारों में 22,615 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. जनवरी में, उन्होंने 35,962 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे. 2025 में, FIIs की खरीदारी का रुझान मिलाजुला रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मंदी का था. उन्होंने भारतीय बाजारों से 1,66,286 करोड़ रुपए निकाल लिए, क्योंकि ट्रेड डील में देरी और हाई वैल्यूएशन ने निवेशकों के मनोबल पर दबाव डाला.

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