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Fire NOC: लखनऊ अग्निकांड के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, आगरा जिला अस्पताल में अधूरी पड़ी फायर सेफ्टी व्यवस्था

Fire NOC For The Agra Hospital: आगरा। लखनऊ में हाल ही में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 मासूम बच्चों की जान चली गई। ये बच्चे तो आग की लपटों में समा गए, लेकिन अपने पीछे कई बड़े सवाल छोड़ गए। आखिर उत्तर प्रदेश और देश में ऐसे हादसे कब तक होते रहेंगे? क्या हर बार किसी बड़ी त्रासदी के बाद ही प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की नींद खुलेगी? यह सवाल आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस हादसे के दिन था।

Fire NOC: लखनऊ अग्निकांड के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, आगरा जिला अस्पताल में अधूरी पड़ी फायर सेफ्टी व्यवस्था
Fire NOC: लखनऊ अग्निकांड के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, आगरा जिला अस्पताल में अधूरी पड़ी फायर सेफ्टी व्यवस्था

अग्निशमन विभाग का एनओसी नहीं

इधर ताजनगरी आगरा भी किसी बड़े खतरे से अछूती नहीं दिखाई दे रही है। आगरा का जिला अस्पताल, जहां प्रतिदिन चार से पांच हजार मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए पहुंचते हैं, खुद सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर सवालों के घेरे में है। ग्राउंड प्लस थ्री मंजिला इस सरकारी अस्पताल में पिछले दो से तीन वर्षों से अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम का कार्य आज तक अधूरा पड़ा हुआ है।

सुरक्षा इंतजाम धरातल गायब

सूत्रों के अनुसार फायर फाइटिंग कार्य कराने वाली एजेंसी को अप्रैल माह में ही भुगतान कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सुरक्षा इंतजाम धरातल पर अधूरे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पताल में कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?


जब इस संबंध में जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. अनीता राठौर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में लखनऊ से एक टीम निरीक्षण के लिए आई थी। संबंधित वेंडर को भुगतान भी किया जा चुका है और स्वास्थ्य मुख्यालय को लगातार स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा मामला उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक के संज्ञान में है। डॉ. राठौर के अनुसार यह कार्य उनकी नियुक्ति से पहले से ही अधूरा चला आ रहा है।

रोजाना हजारों लोग कराते है इलाज

हालांकि इन बयानों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब एक, जहां रोजाना हजारों लोग आते हैं, वहां फायर सेफ्टी की व्यवस्था अधूरी है तो निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की स्थिति कैसी होगी? यह सवाल आम लोगों को भयभीत करने के लिए काफी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। लखनऊ की घटना अभी लोगों के जेहन से उतरी भी नहीं है और आगरा जिला अस्पताल की तस्वीरें तथा हालात एक और संभावित खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं।

जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग एकदूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय तत्काल कार्रवाई करें। क्योंकि हादसे पहले चेतावनी नहीं देते। अगर समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो किसी अनहोनी के बाद जिम्मेदार तय करने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

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