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पहले 499 रुपये, फिर पेमेंट पर पेमेंट… नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगारों को ठग रहा था फर्जी कॉल सेंटर, 5 गिरफ्तार.

पहले 499 रुपये, फिर पेमेंट पर पेमेंट… नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगारों को ठग रहा था फर्जी कॉल सेंटर, 5 गिरफ्तार.

दिल्ली में नौकरी की तलाश कर रहे बेरोजगार युवाओं को नामी कंपनियों में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया था। संगम विहार इलाके में चल रहे इस कॉल सेंटर से पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

आरोप था कि कॉल सेंटर में बैठे लोग खुद को बड़ी कंपनियों का रिक्रूटमेंट प्रतिनिधि बताकर नौकरी तलाशने वाले युवाओं से संपर्क करते थे। शुरुआत महज 499 रुपये से होती थी, लेकिन एक बार पेमेंट करने के बाद उम्मीदवार से अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते थे।

नामी कंपनियों में नौकरी का दिया जाता था झांसा

पुलिस के मुताबिक, आरोपी बेरोजगार युवाओं को डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का ऑफर देते थे।

उम्मीदवारों को बताया जाता था कि उनकी प्रोफाइल शॉर्टलिस्ट हो चुकी थी और अब उनका चयन लगभग तय था। इसके बाद रिक्रूटमेंट प्रोसेस पूरा करने के नाम पर उनसे पैसे मांगे जाते थे।

आरोपियों का खास निशाना ऐसे लोग थे, जिन्होंने टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन किया था। उन्हें फोन करके आरोपी खुद को कंपनी की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा प्रतिनिधि बताते थे और नौकरी मिलने का भरोसा दिलाते थे।

499 रुपये से शुरू होता था ठगी का खेल

ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित बताया गया था। सबसे पहले उम्मीदवार से 499 रुपये कूरियर चार्ज या रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर जमा करवाए जाते थे।

जैसे ही कोई व्यक्ति पहली रकम दे देता था, उसके बाद नई-नई फीस का सिलसिला शुरू हो जाता था। कभी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, कभी रजिस्ट्रेशन तो कभी भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण के नाम पर भुगतान करने को कहा जाता था।

उम्मीदवार को लगातार यह भरोसा दिलाया जाता था कि बस थोड़े और पैसे जमा करने के बाद उसकी नौकरी पक्की हो जाएगी।

इस तरह कई लोग नौकरी की उम्मीद में बार-बार रकम जमा करते चले जाते थे।

पैसे देने से इनकार किया तो कर देते थे नंबर ब्लॉक

पुलिस के अनुसार, जब कोई पीड़ित आगे पैसे देने से मना कर देता या रकम देने में असमर्थता जताता था, तो आरोपी उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते थे।

इसके बाद उम्मीदवार का आरोपियों से संपर्क टूट जाता था और उसे समझ आता था कि नौकरी के नाम पर उसके साथ ठगी की गई है।

आरोपी नौकरी तलाशने वाले लोगों का डेटा हासिल करने के लिए एक जॉब-सपोर्ट ऐप का इस्तेमाल करते थे। इस प्लेटफॉर्म पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की जानकारी के आधार पर उन्हें फोन किया जाता था।

गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने मारा छापा

पुलिस को 1 सितंबर को सूचना मिली थी कि संगम विहार के झरोदा माजरा इलाके में एक संदिग्ध कॉल सेंटर चल रहा था। यहां बेरोजगार लोगों को बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी किए जाने की जानकारी मिली थी।

सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापेमारी की। वहां कई लोग टेली-कॉलर के तौर पर काम करते मिले।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था और कॉल सेंटर से इस्तेमाल होने वाले कई सामान बरामद किए थे।

मोबाइल, डेबिट कार्ड और बैंक दस्तावेज बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस को 9 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 7 डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर लिखे तीन नोटपैड और 6,730 रुपये नकद मिले थे।

इन सामानों को जांच के लिए कब्जे में लिया गया था। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से यह पता लगाने में जुटी थी कि फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क कितना बड़ा था और अब तक कितने नौकरी तलाशने वाले लोगों को निशाना बनाया गया था।

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही थी कि इस पूरे नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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