रायपुर

धमतरी के सत्यांशु ने स्वीडन में लहराया तिरंगा
मन में दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और अदम्य इच्छाशक्ति के सामने दिव्यांगता भी नतमस्तक हो जाती है। धमतरी के विशेष खिलाड़ी सत्यांशु दीप ने इस बात को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सच साबित कर दिखाया है।
स्वीडन में गूंजा भारत का नाम, फिनलैंड को हराकर जीता कांस्य
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक छोटे से कोने से निकलकर स्वीडन के गोथेनबर्ग तक का सफर तय करने वाले सत्यांशु दीप ने इतिहास रच दिया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित सार्थक स्कूल, धमतरी के इस होनहार खिलाड़ी ने स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया कप2026 में भारतीय स्पेशल ओलंपिक्स फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया स
’स्पेशल ओलंपिक्स ट्रॉफीश् वर्ग में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता’
इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के स्पेशल ओलंपिक्स ट्रॉफी वर्ग में भारतीय टीम ने अपने शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। तीसरे स्थान के लिए खेले गए बेहद रोमांचक और कांटे के मुकाबले में भारतीय टीम ने फिनलैंड को 21 से शिकस्त देकर वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ाया।
’सत्यांशु की सफलता समावेशी विकास की पहचान’
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर धमतरी कलेक्टर ने सत्यांशु दीप, उनके परिवार और प्रशिक्षकों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी विशेष खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना और मेडल जीतना पूरे जिले के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। सत्यांशु की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो विशेष बच्चे भी वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं स उन्होंने आगे कहा कि राज्य शासन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सत्यांशु जैसे खिलाड़ियों की सफलता समाज में सकारात्मक सोच को सशक्त करती है और समावेशी विकास की भावना को मजबूत बनाती है।
’मल्टीटैलेंटेड चैंपियन: एथलेटिक्स में भी गाड़ चुके हैं झंडे’
सत्यांशु दीप का यह सफर सिर्फ फुटबॉल तक सीमित नहीं है। वे एक बेहतरीन एथलीट भी हैं। इससे पहले हरियाणा के रोहतक में आयोजित राष्ट्रीय एथलेटिक्स चौंपियनशिप में उन्होंने देश के 23 राज्यों के 500 से अधिक खिलाड़ियों के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सत्यांशु ने लॉन्ग जंप में स्वर्ण पदक और 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता।इसी ऑलराउंड और उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारतीय स्पेशल ओलंपिक्स फुटबॉल टीम में हुआ था।
’सफलता के पीछे का सामूहिक प्रयास’
धमतरी के समाज कल्याण विभाग की उप संचालक ने भी सत्यांशु को बधाई देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक सफलता स्पेशल ओलंपिक्स भारतछत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन, सार्थक स्कूल के नियमित व कड़े प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों की लगन और परिवार के अटूट सहयोग का परिणाम है।
सत्यांशु की यह स्वर्णिम सफलता आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लाखों दिव्यांग बच्चों और युवाओं के लिए एक नई ऊर्जा, प्रेरणा और अपने सपनों को सच करने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।



