
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद ही गंभीर बने हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के चलते लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 तक पहुंच गई है, जबकि अब तक 586 शव बरामद हुए हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के उफान ने नुवाकोट, तिमुरे और आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। मकान, सड़कें और पुल मलबे में तब्दील हो गए हैं।
आपदा के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
वहीं, तिब्बत क्षेत्र में करीब 400 भारतीय नागरिकों के फंसे होने की जानकारी है। चीन की सीमा की ओर फंसे भारतीयों में से 153 नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल सीमा में प्रवेश कर चुके हैं।
सुरंग में फंसे लोगों के लिए भारत भेज रहा विशेषज्ञ टीम
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना स्थल पर कई श्रमिकों और अन्य लोगों के सुरंग में फंसे होने की आशंका पर भी चर्चा हुई।
भारत सरकार ने बचाव अभियान में तकनीकी सहयोग देने के लिए एक विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम नेपाल भेजने का फैसला किया है। इसी क्रम में 11 सदस्यीय भारतीय टीम शनिवार को काठमांडू पहुंची। टीम को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी है। टीम में चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं।
नेपाल में 13,295 सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू ऑपरेशन में तैनात
नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सुरक्षा बलों को तैनात किया है। कुल 13,295 सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं।
इनमें नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाली सेना के 4,200 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 1,845 जवान शामिल हैं।
हेलीकॉप्टरों के जरिए संवेदनशील और प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान भी जारी है। अब तक 3,253 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
तिब्बत में 7 मौतें, 554 लोग लापता
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत क्षेत्र में अब तक आधिकारिक तौर पर 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 554 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल और तिब्बत में लगातार मलबा हटाने, खोज और बचाव अभियान चल रहा है। इसके कारण मृतकों और लापता लोगों से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।
बुधवार की बाढ़ ने मचाई व्यापक तबाही
बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मानव बस्तियों के साथ सड़क, पुल और जलविद्युत ढांचे भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में परिवहन व्यवस्था बहाल करने और राहत पहुंचाने के लिए भी प्रयास तेज कर दिए हैं।
नेपाल ने भारतचीन से मांगी 42 बेली ब्रिज की मदद
बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त सड़क और पुलों के चलते प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच मुश्किल हो गई है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 ‘बेली ब्रिज’ बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है। इन पुलों के निर्माण से बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करने और राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कठिन बचाव अभियानों में अंतरराष्ट्रीय मदद के लिए तैयार नेपाल
नेपाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने सुरक्षाबलों की अधिकतम तैनाती को प्राथमिकता देना चाहता है। स्थानीय सुरक्षाकर्मी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रभावित क्षेत्रों से परिचित हैं।
हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि जिन जटिल मामलों में अत्यंत कठिन संरचनाओं में बचाव के लिए विशेष तकनीकी कौशल की जरूरत होगी, वहां सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है।
भारत की 11 सदस्यीय टीम का पहुंचना इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, चिकित्सा सहायता और मलबा हटाने का अभियान लगातार जारी है।
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