
देश में रसोई गैस (LPG) के विकल्प के तौर पर एथेनॉल को बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऐसी नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत भविष्य में एथेनॉल आधारित कुकिंग स्टोव को प्रोत्साहित किया जा सकता है। प्रस्तावित नीति में सब्सिडी, सप्लाई चेन और घरेलू उपयोग को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस नीति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का उद्देश्य एलपीजी पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। यदि यह योजना लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को एथेनॉल से चलने वाले चूल्हे अपनाने के लिए वित्तीय सहायता या एकमुश्त सब्सिडी दी जा सकती है।
क्यों दिया जा रहा है एथेनॉल पर जोर?
एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला जैव ईंधन है। इसे पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है। सरकार पहले से ही वाहनों के ईंधन में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है और अब घरेलू रसोई में इसके उपयोग की संभावनाएं भी तलाश रही है।
क्या होंगे संभावित फायदे?
- एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है।
- कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च घट सकता है।
- स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
- किसानों और एथेनॉल उद्योग को भी लाभ मिलने की संभावना है।
उत्पादन क्षमता भी बढ़ी
रिपोर्टों के अनुसार, भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर प्रतिवर्ष से अधिक हो चुकी है और इसमें आगे भी वृद्धि की संभावना है। बढ़ते उत्पादन को देखते हुए सरकार इसके नए उपयोगों पर विचार कर रही है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल एथेनॉल आधारित खाना पकाने की नीति पर काम चल रहा है। मंत्रालय की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना या सब्सिडी योजना जारी नहीं की गई है। ऐसे में एलपीजी की जगह एथेनॉल को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले सरकार की अंतिम नीति और दिशा-निर्देशों का इंतजार करना होगा।



