
पाकिस्तान में कथित जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के दबाव से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें अदालत ने 21 वर्षीय हिंदू युवती रीता को उसके परिवार के साथ जाने की अनुमति दे दी। युवती ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने शपथ लेकर कहा कि वह अपनी इच्छा से अपने माता-पिता के घर वापस लौटना चाहती है। इसके बाद कोर्ट ने उसे उसके भाई की सुरक्षित अभिरक्षा में सौंपने का आदेश दिया।
यह मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत के संघार जिले की खिपरो तहसील का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, राणा राजपूत कॉलोनी में रहने वाली रीता 24 अगस्त को अपने घर से लापता हो गई थी। उसके भाई रविशंकर ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
परिवार ने लगाया बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप
रीता के परिवार का आरोप है कि कुछ अज्ञात लोग उसे घर से अपने साथ ले गए थे। परिवार ने दावा किया कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में युवती कुछ लोगों के साथ जाती हुई दिखाई दी थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि रीता अपने साथ मोबाइल फोन और कुछ कीमती सामान लेकर गई थी।
परिवार के मुताबिक, रीता को बाद में पंजाब के गुजरांवाला ले जाया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वहां उस पर इस्लाम धर्म अपनाने और पहले से शादीशुदा नज़ीर हुसैन से विवाह करने का दबाव बनाया गया।
पंजाब पुलिस ने युवती को बरामद किया
मामले की जांच के दौरान पंजाब पुलिस ने रीता को बरामद कर लिया। इसके बाद सोमवार को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। कोर्ट में जांच अधिकारी ने दावा किया कि रीता अपने माता-पिता के पास वापस नहीं जाना चाहती। इसी आधार पर पुलिस की ओर से उसे सरकारी महिला आश्रय गृह दारुल-उल-अमान में रखने का अनुरोध किया गया।
हालांकि, रीता की ओर से पेश वकील असद जमाल और खेता राम ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि युवती अपने भाई के साथ घर वापस जाना चाहती है और उसका भाई भी कोर्ट में मौजूद है।
कोर्ट में युवती ने खुद बताया अपना फैसला
मजिस्ट्रेट ने रीता का बयान शपथ के तहत दर्ज किया। सुनवाई के दौरान युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी इच्छा से अपने माता-पिता के घर लौटना चाहती है।
रीता के बयान को सुनने के बाद अदालत ने उसे उसके भाई के साथ जाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने भाई को उसकी सुरक्षित अभिरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी और निर्देश दिया कि उसे सुरक्षित तरीके से संघार स्थित परिवार के घर पहुंचाया जाए।
अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर उठते रहे हैं सवाल
रीता का यह मामला पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी से जुड़े मामलों के बीच सामने आया है। मानवाधिकार संगठनों की ओर से समय-समय पर ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
हालांकि, इस मामले में युवती ने अदालत के सामने अपने परिवार के साथ जाने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने उसे उसके भाई की निगरानी में घर लौटने की अनुमति दे दी।



