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​इंडिया-US ट्रेड डील पर विदेश मंत्री का बड़ा बयान, कहा- जब तक काम पूरा ना हो, उसे पूरा ना माना जाए

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है. हालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ किया है कि जब तक समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक इसे पूरा नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन आखिरी चरण में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं.

​इंडिया-US ट्रेड डील पर विदेश मंत्री का बड़ा बयान, कहा- जब तक काम पूरा ना हो, उसे पूरा ना माना जाए

नई दिल्ली में NDTV वर्ल्ड समिट के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका की बातचीत में जो मुद्दे अभी बाकी हैं, उन पर दोनों देशों की टीमें काम कर रही हैं. उन्होंने कहा, जब तक काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक उसे पूरा नहीं माना जा सकता. जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी इस समझौते के जल्द पूरा होने के संकेत दे चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि भारतअमेरिका व्यापार समझौता काफी करीब है. वहीं, रुबियो ने इस सप्ताह मुंबई में जयशंकर के साथ बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश समझौते के काफी नजदीक पहुंच चुके हैं. उनके मुताबिक, कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और दोनों पक्ष जल्द प्रगति की घोषणा करना चाहते हैं. हालांकि, जयशंकर ने यह बताने से इनकार कर दिया कि समझौते में किन मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है. उन्होंने कहा कि इन मामलों को बातचीत कर रही टीमें ही सुलझाएंगी.

एक साल से ज्यादा समय से चल रही है बातचीत

भारत और अमेरिका पिछले एक साल से ज्यादा समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. इसमें बाजार तक पहुंच, आयात शुल्क यानी टैरिफ, कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और कारोबार से जुड़े नियमों जैसे मुद्दे शामिल हैं. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है. हालांकि, समझौते के अंतिम स्वरूप और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.

दूसरे विकल्प भी तलाशने की बात

जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में किसी भी देश के लिए व्यापार, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता को तय मानकर चलना सही नहीं है. दुनिया में अनिश्चितता बढ़ रही है. ऐसे में देशों और कंपनियों को अपनी जरूरतों के लिए केवल एक ही देश या स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि व्यापार पर पाबंदियां, ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और संसाधनों पर प्रतिबंध जैसे कारण देशों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर रहे हैं. जयशंकर और रुबियो ने मुंबई में हुई बैठक के दौरान व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की थी. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया समेत क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी बातचीत की.

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