दिल्ली की द्वारका कोर्ट के पूर्व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमन प्रताप सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. दरअसल, अमन प्रताप ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले पर विरोध दर्ज कराया है. वहीं जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रोबेशन पर तैनात एडीजे अमन प्रताप सिंह की सेवा को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था. इससे पहले पूर्व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमन प्रताप सिंह की सेवा समाप्ति को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 फरवरी 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई दंडात्मक नहीं, बल्कि परिवीक्षाधीन अधिकारी की अनुपयुक्तता के आधार पर की गई टर्मिनेशन सिम्पलिसिटर है. यह मामला Aman Pratap Singh vs Govt Of NCT Of Delhi & Anr से संबंधित है, जिसमें अदालत ने विस्तार से परिस्थितियों का विश्लेषण किया.
वीडियो वायरल होने के बाद किया बर्खास्त
कोर्ट के मुताबिक, अमन प्रताप सिंह की बर्खास्तगी किसी विशेष आरोप में दोषसिद्धि के आधार पर नहीं, बल्कि उनके समग्र कार्य प्रदर्शन और व्यवहार के मूल्यांकन के बाद की गई. बर्खास्तगी का प्रमुख कारण एक वायरल वीडियो बना, जिसमें उन्हें अदालत कक्ष में वकीलों पर चिल्लाते हुए देखा गया था. इस घटना ने न्यायिक गरिमा और आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. इसके अलावा, उनके खिलाफ कुल आठ शिकायतें दर्ज थीं, जिनमें कार्यशैली और व्यवहार संबंधी मुद्दे शामिल थे. आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके प्रदर्शन को औसत से कम बताया गया.
दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर अमन
अमन प्रताप सिंह की नियुक्ति 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (DHJS) में हुई थी. वे दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर थे. इस अवधि में अधिकारी के आचरण, निर्णय क्षमता, और पेशेवर व्यवहार का समग्र मूल्यांकन किया जाता है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इस मामले में उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट है कि निर्णय प्रशासनिक संतुष्टि पर आधारित था, न कि दंडात्मक कार्रवाई के रूप में.



